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पखांजुर/ बांदे मदन चौक पर भाषा शहीदों को श्रद्धांजलि, मातृभाषा बांग्ला शिक्षा की मांग तेज।

बान्दे मदन चौक पर भाषा शहीदों को श्रद्धांजलि, मातृभाषा बांग्ला शिक्षा की मांग तेज।

पखांजूर/बान्दे (22 फरवरी)। अंतरराष्ट्रीय मातृभाषा दिवस के अवसर पर बान्दे स्थित मदन चौक में मातृभाषा बांग्ला शिक्षा एवं संग्राम समिति द्वारा भाषा आंदोलन के शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित की गई। कार्यक्रम में समिति पदाधिकारियों, बुद्धिजीवियों, राहगीरों तथा आम नागरिकों ने पुष्पांजलि अर्पित कर भाषा शहीदों को नमन किया।

इस अवसर पर समिति ने मुख्यमंत्री, उपमुख्यमंत्री, शिक्षा मंत्री, मुख्य सचिव तथा कलेक्टर के नाम अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व), पखांजूर को ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में प्राथमिक, पूर्व माध्यमिक, हाईस्कूल एवं हायर सेकेंडरी स्तर पर मातृभाषा बांग्ला में शिक्षा प्रारंभ करने, शिक्षकों की नियुक्ति, पृथक पाठ्यक्रम एवं पाठ्यपुस्तकों के मुद्रण की मांग की गई है। समिति ने छत्तीसगढ़ पाठ्यपुस्तक निगम, रायपुर से बांग्ला भाषा में अलग से पुस्तकें प्रकाशित करने की भी मांग की।
समिति ने 16 जनवरी को पखांजूर के नेताजी सुभाष स्टेडियम में आयोजित कार्यक्रम में मुख्यमंत्री द्वारा की गई घोषणाओं का स्वागत किया। मुख्यमंत्री ने नए शिक्षा सत्र से परलकोट क्षेत्र के 135 ग्रामों की प्राथमिक शालाओं में बांग्ला भाषा में पढ़ाई शुरू करने की घोषणा की थी। समिति ने इस आश्वासन के लिए मुख्यमंत्री का आभार व्यक्त करते हुए इसे मातृभाषा शिक्षा की दिशा में सकारात्मक पहल बताया।

समिति अध्यक्ष तथा पीव्ही-87 ग्राम अध्यक्ष नारायण दास, बान्दे बाजार कमेटी के उपाध्यक्ष निर्मल बैपारी सहित अन्य वक्ताओं ने कहा कि डी.एन.के. परियोजना के अंतर्गत बसे 135 गांवों में बड़ी संख्या में बांग्लाभाषी परिवार निवास करते हैं। उन्होंने बताया कि अविभाजित मध्यप्रदेश काल में प्राथमिक से लेकर हायर सेकेंडरी स्तर तक बांग्ला भाषा में शिक्षा की व्यवस्था थी, किंतु विगत वर्षों में बांग्ला शिक्षकों के पद रिक्त होने तथा नई भर्तियों में स्वीकृति नहीं मिलने से स्थिति प्रभावित हुई है।
समिति के अनुसार 1989 के बाद बांग्ला भाषा के शिक्षकों के पदों पर नियमित नियुक्ति नहीं होने से अनेक विद्यालयों में मातृभाषा में शिक्षा बाधित है। उन्होंने कहा कि पदोन्नति एवं क्रमोन्नति के कारण कई पद रिक्त हुए, परंतु नई भर्ती में बांग्ला शिक्षकों के पद स्वीकृत नहीं किए गए। इससे बांग्लाभाषी छात्र-छात्राएं मातृभाषा में अध्ययन के अवसर से वंचित हो रहे हैं।
समिति की प्रमुख मांगों में मातृभाषा बांग्ला एवं स्थानीय बोली में शिक्षा हेतु शिक्षकों की शीघ्र नियुक्ति, परलकोट क्षेत्र में सेवा दे चुके 134 शिक्षकों को भर्ती प्रक्रिया में बोनस अंक एवं प्राथमिकता, हिंदी-बांग्ला संयुक्त पुस्तकों के स्थान पर पृथक बांग्ला पुस्तकों का प्रकाशन, विश्वविद्यालय स्तर पर बांग्ला में स्नातक पाठ्यक्रम प्रारंभ करने की व्यवस्था तथा भाषा विशेषज्ञों के साथ बांग्ला विद्वानों को शिक्षा मंडल में शामिल करने की मांग शामिल है।
इसके अतिरिक्त समिति ने शिक्षा प्रणाली में पुनः पास-फेल व्यवस्था लागू करने, प्रत्येक कक्षा की अंकसूची एवं ऑनलाइन पोर्टल में बांग्ला विषय के अंक दर्ज करने की पृथक व्यवस्था तथा रिक्त पदों पर शीघ्र नियुक्ति की मांग भी की है।
कार्यक्रम में केशव सिंह, अजित सेन, शंभु दास, गौतम बनिक, बिपुल विश्वास, सरजीत सरकार, नंद शील, अजित मिस्त्री (समिति अध्यक्ष), सुजीत कर्मकार, फनिंद्र नाथ सरकार, पलाश दीवान, अजय कर, ज्योत्सना अधिकारी, अनिमेष विश्वास सहित बड़ी संख्या में नागरिक उपस्थित रहे।

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