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पखांजुर/ मानवता की मिसाल: रूप सिंह पोटाई बने ‘मामा’, बंगाली रीति-रिवाज से कराई पायल सरकार की शादी।

परलकोट क्षेत्र में सामाजिक समरसता की अनूठी पहल, आदिवासी नेता ने निभाई बंगाली परंपरा की जिम्मेदारी, पूरे इलाके में हो रही सराहना

मानवता की मिसाल: रूप सिंह पोटाई बने ‘मामा’, बंगाली रीति-रिवाज से कराई पायल सरकार की शादी

पखांजूर(बारदा), श्रीदाम ढाली। परलकोट की मिट्टी में जन्मे और क्षेत्र की जनता के बीच अपनी पहचान बनाने वाले कांग्रेस के वरिष्ठ नेता रूपसिंह पोटाई उर्फ मडडू ने एक बार फिर मानवता और सामाजिक एकता की मिसाल पेश की है। उन्होंने ऐसा कार्य किया है जिसकी चर्चा आज पूरे परलकोट क्षेत्र में हो रही है। जाति और धर्म की सीमाओं से ऊपर उठकर उन्होंने एक बेटी के विवाह में ‘मामा’ बनकर वह जिम्मेदारी निभाई, जो समाज में बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती है।

दरअसल ग्राम पी.व्ही. 67 सत्यनगर में रहने वाले प्रहलाद सरकार की पुत्री पायल सरकार का विवाह तय हुआ था। परिवार में शादी की तैयारियां चल रही थीं, लेकिन एक सामाजिक परंपरा को लेकर परिवार चिंतित था। पायल सरकार का कोई सगा मामा नहीं था, जबकि बंगाली समाज में विवाह के दौरान मामा की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जाती है।

बंगाली समाज में मामा की अहम भूमिका।

बंगाली संस्कृति में विवाह केवल दो लोगों का संबंध नहीं बल्कि एक पारंपरिक और सांस्कृतिक उत्सव होता है। इस उत्सव में कई ऐसी रस्में होती हैं जिन्हें निभाने में मामा की अहम भूमिका होती है। विवाह से पहले होने वाले कार्यक्रमों और कई रस्मों में मामा को मुख्य जिम्मेदारी दी जाती है। यदि मामा न हो तो कई बार परिवार को सामाजिक रूप से असहज स्थिति का सामना करना पड़ता है। यही कारण था कि पायल सरकार के परिवार के सामने भी एक बड़ी समस्या खड़ी हो गई थी।

खबर मिलते ही आगे आए रूप सिंह पोटाई।

जब इस बात की जानकारी क्षेत्र के लोकप्रिय जननेता रूपसिंह पोटाई को मिली तो उन्होंने तुरंत इस समस्या का समाधान निकालने का निर्णय लिया। उन्होंने पायल सरकार को अपनी भांजी की तरह अपनाते हुए स्वयं मामा की भूमिका निभाने का फैसला किया।

रूप सिंह पोटाई ने पायल को अपने घर लाकर बंगाली समाज की सभी पारंपरिक रस्मों को पूरे सम्मान और विधि-विधान के साथ निभाया। उन्होंने मामा की तरह सभी सामाजिक कर्तव्यों को पूरा किया और विवाह की रस्मों को सफलतापूर्वक संपन्न कराया। उनकी इस पहल से न केवल पायल सरकार और उनके परिवार की चिंता दूर हुई, बल्कि पूरे समाज के सामने एक प्रेरणादायक उदाहरण भी प्रस्तुत हुआ।

आदिवासी समाज से आने वाले नेता ने दिया बड़ा संदेश।

रूपसिंह पोटाई आदिवासी समाज से आते हैं और लंबे समय से सामाजिक व राजनीतिक गतिविधियों में सक्रिय हैं। उन्होंने हमेशा समाज के सभी वर्गों को साथ लेकर चलने की बात कही है।

एक आदिवासी नेता द्वारा बंगाली समाज की परंपराओं को समझते हुए उसमें भाग लेना और जिम्मेदारी निभाना वास्तव में सामाजिक समरसता और भाईचारे का प्रतीक है। इस घटना ने यह साबित कर दिया कि इंसानियत और आपसी सहयोग किसी भी जाति या धर्म से बड़ा होता है।

परिवार ने जताया आभार

पायल सरकार के पिता प्रहलाद सरकार ने रूपसिंह पोटाई एवं उनके परिवार के इस सहयोग के लिए भावुक होकर धन्यवाद व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि बेटी की शादी में जो सबसे बड़ी चिंता थी, उसे पोटाई जी ने अपने एक फैसले से दूर कर दिया।

उन्होंने कहा कि जिस तरह उन्होंने मामा की जिम्मेदारी निभाई, उससे पूरा परिवार भावुक हो गया। यह केवल एक सामाजिक मदद नहीं थी बल्कि एक ऐसा कार्य था जिसने परिवार को सम्मान और खुशी दोनों दी।

पूरे परलकोट क्षेत्र में चर्चा

इस घटना के बाद पूरे परलकोट क्षेत्र में रूपसिंह पोटाई की सराहना हो रही है। स्थानीय लोग इसे सामाजिक एकता और भाईचारे का अनूठा उदाहरण बता रहे हैं।

कई लोगों का कहना है कि आज के समय में जब समाज में कई बार धर्म और जाति के नाम पर विभाजन की बातें होती हैं, ऐसे समय में इस तरह की घटनाएं समाज को एक सकारात्मक दिशा देती हैं।

समाज के लिए प्रेरणा

रूपसिंह पोटाई का यह कार्य केवल एक परिवार की मदद तक सीमित नहीं है, बल्कि यह पूरे समाज के लिए एक प्रेरणा बन गया है। इससे यह संदेश मिलता है कि रिश्ते केवल खून से ही नहीं बल्कि इंसानियत और दिल से भी बनते हैं। एक आदिवासी नेता द्वारा बंगाली समाज की बेटी का मामा बनकर विवाह की रस्में निभाना वास्तव में सामाजिक सद्भाव और एकता का प्रतीक है।

मानवता सबसे बड़ा धर्म

रूपसिंह पोटाई की इस पहल ने एक बार फिर यह साबित कर दिया कि मानवता ही सबसे बड़ा धर्म है। जब किसी को जरूरत होती है तो समाज के लोग अगर एक-दूसरे के साथ खड़े हों, तो हर समस्या का समाधान संभव है।उनका यह कार्य आने वाली पीढ़ियों के लिए भी एक प्रेरणा बनेगा और समाज को यह याद दिलाएगा कि इंसानियत की ताकत सबसे बड़ी होती है।

लोगों ने कहा – ऐसे नेता समाज की पहचान होते हैं
स्थानीय लोग भुवन बड़ाई, समर मृधा, प्रेमानंद मंडल, राजू हालदार, गौरांग सरकार, श्रीवास सरकार का कहना है कि रूपसिंह पोटाई जैसे नेता समाज के लिए गर्व की बात हैं। वे केवल राजनीति तक सीमित नहीं रहते बल्कि लोगों के सुख-दुख में भी साथ खड़े रहते हैं। यही कारण है कि क्षेत्र में उनकी लोकप्रियता लगातार बढ़ रही है।

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