
बारकोट के जंगल में लगी भीषण आग: वन विभाग की लापरवाही पर उठे गंभीर सवाल।
पखांजुर/संगम, 22 मार्च (सुब्रत कुमेटी)। कोयलीबेड़ा ब्लॉक अंतर्गत ग्राम बारकोट के जंगल में लगी भीषण आग। देखते ही देखते आग ने विकराल रूप धारण कर लिया और बड़े क्षेत्र में फैली वन संपदा को नुकसान पहुंचने की आशंका गहराने लगी। स्थानीय ग्रामीणों के अनुसार, आग लगने के बाद काफी समय तक वन विभाग की ओर से कोई त्वरित और प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई। जिससे स्थिति और बिगड़ती चली गई। बताया जा रहा है कि जंगल में फैले सूखे पत्तों और झाड़ियों के कारण आग तेजी से फैलती गई, वहीं तेज हवाओं ने आग को और भड़काने का काम किया। हालात इतने गंभीर हो गए कि ग्रामीणों को अपने स्तर पर ही आग बुझाने के प्रयास करने पड़े, लेकिन संसाधनों की कमी के चलते उन्हें भारी परेशानियों का सामना करना पड़ा।
वन विभाग की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल।

इस घटना ने वन विभाग की तैयारियों और सतर्कता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि हर वर्ष गर्मी के मौसम में इस तरह की घटनाएं होती हैं, इसके बावजूद विभाग द्वारा न तो पूर्व तैयारी की जाती है और न ही निगरानी व्यवस्था मजबूत की जाती है। इस लापरवाही से न केवल वन संपदा को नुकसान हुआ, बल्कि वन्य जीवों के जीवन पर भी खतरा उत्पन्न हो गया है।
पर्यावरण और वन्यजीवों पर संकट
जंगल में लगी इस आग से पेड़-पौधों के साथ-साथ वहां रहने वाले वन्य जीव भी प्रभावित हुए हैं। कई छोटे जीव-जंतु आग की चपेट में आ सकते हैं, जिससे जैव विविधता पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है।
ग्रामीण की सूझबूझ से टला बड़ा नुकसान
आग लगने से बारकोट निवासी सुनहेर कुमेटी की फसल और अन्य सामग्री भी खतरे में आ गई थी। जंगल के पास रखी उनकी मक्का फसल और अन्य वस्तुएं जलने की कगार पर थीं, लेकिन उन्होंने समय रहते सतर्कता दिखाते हुए आग पर काबू पा लिया और बड़ा नुकसान होने से बचा लिया। ग्रामीणों का कहना है कि यदि वे स्वयं प्रयास नहीं करते, तो कई किसानों की फसलें और संपत्ति जलकर खाक हो सकती थीं। ग्रामीणों ने यह भी कहा कि जंगल उनकी आजीविका का मुख्य स्रोत है, ऐसे में उसकी सुरक्षा सुनिश्चित करना शासन और प्रशासन की प्राथमिक जिम्मेदारी है।
बारकोट के जंगल में लगी आग ने एक बार फिर वन विभाग की तैयारियों और कार्यप्रणाली की पोल खोल दी है। यदि समय रहते प्रभावी और जिम्मेदार कदम नहीं उठाए गए, तो भविष्य में इस तरह की घटनाएं और भी गंभीर रूप ले सकती हैं। अब देखना होगा कि प्रशासन इस मामले को कितनी गंभीरता से लेता है और दोषियों पर कार्रवाई के साथ-साथ जंगलों की सुरक्षा के लिए क्या ठोस कदम उठाए जाते हैं।




