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छत्तीसगढ़ में धर्म स्वातंत्र्य अधिनियम-2026 लागू, जबरन धर्म परिवर्तन पर सख्त सजा।
बस्तर टाइम्स न्यूज, रायपुर/ छत्तीसगढ़ सरकार ने राज्य में छत्तीसगढ़ धर्म स्वातंत्र्य अधिनियम, 2026 लागू कर दिया है। राजपत्र में अधिसूचना जारी होने के बाद यह कानून 10 जुलाई 2026 से पूरे प्रदेश में प्रभावी हो गया है। नए कानून के तहत बल, प्रलोभन, धोखाधड़ी या अनुचित प्रभाव डालकर धर्म परिवर्तन कराने के मामलों में कड़ी सजा और भारी जुर्माने का प्रावधान किया गया है।
अधिनियम के अनुसार, ऐसे मामलों में दोषी पाए जाने पर 7 से 10 वर्ष तक के कारावास और न्यूनतम 5 लाख रुपये के जुर्माने का प्रावधान है। यदि धर्म परिवर्तन का शिकार महिला, नाबालिग, अनुसूचित जाति (SC), अनुसूचित जनजाति (ST) या अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) का व्यक्ति है, तो दोषी को 10 से 20 वर्ष तक के कारावास की सजा दी जा सकेगी।
कानून में सामूहिक धर्म परिवर्तन को गंभीर अपराध की श्रेणी में रखा गया है। ऐसे मामलों में दोषी को आजीवन कारावास तथा 25 लाख रुपये तक के जुर्माने का प्रावधान है।
अधिनियम के तहत धर्म परिवर्तन करने के इच्छुक व्यक्ति को धर्म परिवर्तन से 60 दिन पूर्व संबंधित जिला कलेक्टर को लिखित सूचना देना अनिवार्य होगा। साथ ही, यदि किसी विवाह का उद्देश्य केवल धर्म परिवर्तन कराना पाया जाता है, तो सक्षम न्यायालय ऐसे विवाह को शून्य (Void) घोषित कर सकेगा।
धर्म परिवर्तन से जुड़े मामलों के त्वरित निपटारे के लिए राज्य सरकार ने प्रत्येक जिले में विशेष न्यायालयों के गठन का प्रावधान किया है। इन मामलों की सुनवाई छह माह के भीतर पूरी करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।
सरकार का कहना है कि इस कानून का उद्देश्य बल, प्रलोभन, धोखाधड़ी या अनुचित प्रभाव के माध्यम से होने वाले अवैध धर्म परिवर्तन पर प्रभावी रोक लगाना तथा नागरिकों की धार्मिक स्वतंत्रता की रक्षा करना है।
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