
पी. व्ही. 63 के अंबेडकर चौक में गूंजे समानता और अधिकारों के स्वर, धूमधाम से मनाई गई अम्बेडकर जयंती
पखांजुर/ बलरामपुर। ग्राम पंचायत बलरामपुर के आश्रित ग्राम पी. व्ही. 63 स्थित अंबेडकर चौक में मंगलवार को भारत के संविधान निर्माता डॉ. भीमराव अम्बेडकर की जयंती बड़े ही हर्षोल्लास और उत्साह के साथ मनाई गई। इस अवसर पर पूरे गांव में उत्सव का माहौल देखने को मिला। कार्यक्रम में सभी वर्गों के लोगों ने एकजुट होकर बाबा साहेब को श्रद्धांजलि अर्पित की और उनके बताए मार्ग पर चलने का संकल्प लिया।
कार्यक्रम की शुरुआत बाबा साहेब की प्रतिमा पर माल्यार्पण और दीप प्रज्वलन के साथ की गई। इसके बाद उपस्थित अतिथियों और ग्रामीणों ने बारी-बारी से पुष्प अर्पित कर उन्हें नमन किया। आयोजन में सामाजिक समरसता, शिक्षा और समानता के संदेश को प्रमुखता से रखा गया।
इस अवसर पर वरिष्ठ नागरिक प्रेमानंद मंडल ने अपने संबोधन में बाबा साहेब के जीवन और संघर्षों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि डॉ. भीमराव अम्बेडकर केवल एक महान संविधान निर्माता ही नहीं थे, बल्कि वे सामाजिक न्याय के सच्चे प्रहरी भी थे। उन्होंने अपना पूरा जीवन समाज के कमजोर और वंचित वर्गों के उत्थान के लिए समर्पित कर दिया। प्रेमानंद मंडल ने कहा कि आज हम जिस लोकतंत्र और अधिकारों का लाभ उठा रहे हैं, वह बाबा साहेब के अथक प्रयासों का ही परिणाम है। उन्होंने युवाओं से अपील करते हुए कहा कि वे शिक्षा को अपना सबसे बड़ा हथियार बनाएं और समाज में सकारात्मक बदलाव लाने के लिए आगे आएं।
उन्होंने यह भी कहा कि आज के समय में बाबा साहेब के विचार और अधिक प्रासंगिक हो गए हैं। समाज में व्याप्त असमानता, भेदभाव और अशिक्षा को दूर करने के लिए हमें उनके बताए मार्ग पर चलना होगा। उन्होंने ग्रामीणों को एकजुट रहने और आपसी भाईचारे को मजबूत करने का संदेश दिया।
कार्यक्रम में पूर्व विधायक प्रत्याशी रूपसिंह पोटाई ने भी सभा को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि डॉ. अम्बेडकर ने भारत को एक ऐसा संविधान दिया, जो सभी नागरिकों को समान अधिकार प्रदान करता है। उन्होंने कहा कि बाबा साहेब का सपना था कि देश का हर व्यक्ति शिक्षित, जागरूक और आत्मनिर्भर बने। इस दिशा में हमें लगातार प्रयास करते रहना चाहिए।
रूपसिंह पोटाई ने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में शिक्षा और जागरूकता का स्तर बढ़ाना अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने कहा कि जब तक गांव का हर बच्चा शिक्षित नहीं होगा, तब तक समाज का समुचित विकास संभव नहीं है। उन्होंने युवाओं से आग्रह किया कि वे नशा, अशिक्षा और सामाजिक कुरीतियों से दूर रहकर अपने भविष्य को उज्ज्वल बनाने की दिशा में कार्य करें।
उन्होंने यह भी कहा कि अम्बेडकर जयंती केवल एक पर्व नहीं है, बल्कि यह हमें अपने अधिकारों और कर्तव्यों के प्रति जागरूक करने का अवसर भी है। उन्होंने सभी ग्रामीणों से अपील की कि वे बाबा साहेब के आदर्शों को अपने जीवन में उतारें और समाज को बेहतर बनाने में योगदान दें।
कार्यक्रम में अन्य वक्ताओं ने संविधान की मूल भावना, न्याय, स्वतंत्रता, समानता और बंधुत्व पर विशेष जोर दिया। उन्होंने कहा कि इन मूल्यों को अपनाकर ही हम एक सशक्त और समृद्ध समाज का निर्माण कर सकते हैं।
ग्रामीणों ने इस अवसर पर एकजुट होकर सामाजिक एकता और भाईचारे को बनाए रखने का संकल्प लिया। महिलाओं की भी कार्यक्रम में सक्रिय भागीदारी देखने को मिली, जिससे यह आयोजन और भी विशेष बन गया।
कार्यक्रम के अंत में सभी उपस्थित लोगों के बीच प्रसाद वितरण किया गया। आयोजकों ने सभी अतिथियों और ग्रामीणों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि इस तरह के आयोजन समाज को जोड़ने और जागरूकता फैलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
इस आयोजन में पूर्व उपसरपंच भुवन बड़ाई, स्वपन देवनाथ, समर मृधा, संजय बड़ाई, श्रीदाम ढाली, प्रकक्षित मंडल, परमेश मंडल, संबित विश्वास, दिवाकर देवनाथ, संजय कर्मकार, गोलक मंडल, गणेश सरकार सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण उपस्थित रहे।




