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पखांजुर/ माचपल्ली–पी.व्ही. 62 मार्ग की बदहाल स्थिति से ग्रामीण त्रस्त, दुर्घटना का खतरा बढ़ा।

गड्ढों में तब्दील हुआ माचपल्ली मार्ग, आवागमन बना जोखिम भरा

बस्तर टाइम्स के लिए सुब्रत कुमेटी की रिपोर्ट

माचपल्ली–पी.व्ही. 62 मार्ग की बदहाल स्थिति से ग्रामीण त्रस्त, दुर्घटना का खतरा बढ़ा।

पखांजूर@12 फरवरी। माचपल्ली से पी.व्ही 62 को जोड़ने वाला प्रमुख ग्रामीण मार्ग इन दिनों अपनी बदहाल स्थिति के कारण चर्चा में है। सड़क पर जगह-जगह गहरे गड्ढे, उखड़ी डामर परत से राहगीरों के लिए मुसीबत बन चुके हैं। स्थानीय ग्रामीणों में इस स्थिति को लेकर गहरा आक्रोश व्याप्त है। उनका कहना है कि लंबे समय से मरम्मत नहीं होने के कारण मार्ग पूरी तरह जर्जर हो चुका है और अब यह दुर्घटनाओं को खुला निमंत्रण दे रहा है।
ग्रामीणों के अनुसार, यह सड़क आसपास के कई गांवों के लिए मुख्य संपर्क मार्ग है। प्रतिदिन सैकड़ों की संख्या में स्कूली छात्र-छात्राएं, किसान, व्यापारी और आमजन इसी रास्ते से आवागमन करते हैं। सड़क की खराब हालत के कारण लोगों को न केवल अतिरिक्त समय लग रहा है, बल्कि वाहनों के बार-बार खराब होने की समस्या भी सामने आ रही है।

स्थानीय निवासी तिलक कोरेटी, पत्ती दुग्गा और रामसिंह कुमेटी ने बताया कि मार्ग की मरम्मत लंबे समय से नहीं कराई गई है। उन्होंने कहा कि बरसात के मौसम में स्थिति और भी भयावह हो जाती है। गहरे गड्ढों में पानी भर जाने से सड़क और गड्ढे के बीच अंतर समझ पाना मुश्किल हो जाता है। इससे दोपहिया वाहन चालकों के फिसलने और चारपहिया वाहनों के फंसने की घटनाएं बढ़ जाती हैं। कई बार हादसे भी हो चुके हैं, लेकिन प्रशासन की ओर से अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है।

ग्रामीणों का कहना है कि सड़क की दुर्दशा का सीधा असर बच्चों की पढ़ाई पर भी पड़ रहा है। कई छात्र-छात्राएं प्रतिदिन इसी मार्ग से स्कूल और कॉलेज जाते हैं। खराब सड़क के कारण उन्हें समय पर पहुंचने में परेशानी होती है। वहीं, किसानों को अपनी उपज मंडी तक ले जाने में अतिरिक्त समय और खर्च उठाना पड़ रहा है। व्यापारी वर्ग भी प्रभावित है, क्योंकि परिवहन में देरी से व्यवसाय पर असर पड़ रहा है।

स्थानीय नागरिकों का यह भी कहना है कि यह मार्ग क्षेत्रीय विकास के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। यदि सड़क की हालत ऐसी ही बनी रही तो भविष्य में बड़ी दुर्घटना से इंकार नहीं किया जा सकता। उन्होंने प्रशासन से मांग की है कि तत्काल सर्वे कराकर सड़क की मरम्मत एवं पुनर्निर्माण की प्रक्रिया शुरू की जाए। साथ ही, बरसात से पहले गड्ढों को भरने और जल निकासी की समुचित व्यवस्था करने की भी मांग की गई है।

ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि शीघ्र ही सड़क की मरम्मत नहीं कराई गई तो वे आंदोलन का रास्ता अपनाने को मजबूर होंगे। उनका कहना है कि विकास की बात तब सार्थक होगी, जब मूलभूत सुविधाएं सुदृढ़ हों। सड़क जैसी आधारभूत संरचना की अनदेखी से आमजन को रोजाना परेशानी झेलनी पड़ रही है।
अब देखना यह है कि शासन- प्रशासन कब ग्रामीणों की समस्या को गंभीरता से लेते है और कब समाधान की दिशा में ठोस कदम उठाते है?

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