
छोटेबेठिया में लाख पालन प्रशिक्षण शिविर: वैज्ञानिक खेती से बढ़ेगी ग्रामीणों की आय
पखांजुर/बांदे@22 मार्च (श्रीदाम ढाली)। बांदे वन परिक्षेत्र के क्लस्टर छोटेबेठिया में 21 मार्च को एक भव्य एवं उपयोगी लाख पालन प्रशिक्षण शिविर का आयोजन किया गया। इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में क्षेत्र के विभिन्न ग्राम छोटेबेठिया, खण्डी, पी.व्ही. 91, पी. व्ही. 92, बेचाघाट, जामरूटनी, माझीकुटनी एवं कलरकुटनी के कृषकों, जनप्रतिनिधियों तथा ग्रामीणों ने बड़ी संख्या में भाग लिया।
कार्यक्रम का उद्देश्य ग्रामीणों को वैज्ञानिक पद्धति से लाख उत्पादन की जानकारी देकर उनकी आय में वृद्धि करना तथा वन आधारित आजीविका को मजबूत बनाना था। इस अवसर पर जिले से आए मास्टर ट्रेनर्स पुरुषोत्तम मांडवी, नरेंद्र पटेल, शंभू मंडावी एवं एवन सोरी ने किसानों को विस्तृत प्रशिक्षण प्रदान किया।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि सुकलाल देहारी अध्यक्ष, जिला यूनियन पश्चिम भानुप्रतापपुर ने अपने संबोधन में कहा कि लाख पालन आज के समय में ग्रामीणों के लिए आय का एक सशक्त एवं टिकाऊ माध्यम बन सकता है। उन्होंने बताया कि छत्तीसगढ़ का वन क्षेत्र लाख उत्पादन के लिए अत्यंत उपयुक्त है और यदि किसान इसे वैज्ञानिक तरीके से अपनाते हैं, तो कम लागत में अधिक लाभ अर्जित कर सकते हैं। उन्होंने किसानों को प्रेरित करते हुए कहा कि पारंपरिक खेती के साथ-साथ लाख पालन को अपनाकर वे आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बन सकते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि सरकार एवं विभिन्न योजनाओं के माध्यम से किसानों को प्रशिक्षण, तकनीकी सहायता एवं बाजार उपलब्ध कराया जा रहा है, जिसका लाभ उठाना चाहिए।
मुख्य अतिथि ने डीएमएफ एवं वन विभाग की पहल की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे प्रशिक्षण कार्यक्रम ग्रामीण विकास की दिशा में मील का पत्थर साबित होंगे।
मास्टर ट्रेनर्स द्वारा दी गई वैज्ञानिक जानकारी
मास्टर ट्रेनर पुरुषोत्तम मांडवी ने लाख की खेती के मूल सिद्धांतों पर प्रकाश डालते हुए बताया कि लाख एक प्रकार का कीट है, जो पेड़ों की टहनियों पर रहकर रेजिन यानी लाख उत्पन्न करता है। उन्होंने किसानों को उपयुक्त होस्ट वृक्षों जैसे—कुसुम, पलाश एवं बेर—की पहचान एवं चयन की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि लाख उत्पादन के लिए स्वस्थ एवं मजबूत पेड़ों का चयन अत्यंत आवश्यक है। साथ ही, उन्होंने प्रूनिंग यानी छंटाई की सही तकनीक, समय और विधि समझाई, जिससे उत्पादन में वृद्धि होती है।
मास्टर ट्रेनर नरेंद्र पटेल ने किसानों को लाख पालन के बीज लाख के चयन और उसके सही समय पर उपयोग की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि यदि गुणवत्तापूर्ण बीज लाख का उपयोग किया जाए, तो उत्पादन में कई गुना वृद्धि संभव है। उन्होंने किसानों को संक्रमण प्रक्रिया के बारे में विस्तार से बताया कि किस प्रकार बीज लाख को पेड़ों पर बांधा जाता है और किस समय यह कार्य करना चाहिए। साथ ही उन्होंने रोग एवं कीट नियंत्रण के उपाय भी बताए।
मास्टर ट्रेनर शंभू मंडावी ने प्रशिक्षण को और अधिक व्यावहारिक बनाते हुए किसानों को फील्ड डेमो के माध्यम से लाख पालन की पूरी प्रक्रिया समझाई। उन्होंने बताया कि लाख पालन में समय-समय पर निगरानी, पेड़ों की देखभाल और उचित प्रबंधन आवश्यक है। उन्होंने किसानों को कटाई के सही समय और विधि के बारे में बताया, जिससे गुणवत्ता युक्त लाख प्राप्त हो सके।
ट्रेनर एवन सोरी ने किसानों को लाख उत्पादन के बाद उसकी प्रोसेसिंग, भंडारण एवं विपणन की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि लाख से कई प्रकार के उत्पाद बनाए जाते हैं, जिनकी बाजार में अच्छी मांग है। उन्होंने किसानों को यह भी समझाया कि यदि वे समूह बनाकर कार्य करें, तो उन्हें बेहतर कीमत एवं बाजार मिल सकता है। उन्होंने लाख पालन को आर्थिक सशक्तिकरण का मजबूत माध्यम बताया।

कार्यक्रम की अध्यक्षता सुरज देहारी, अध्यक्ष, प्राथमिक वनोपज सहकारी समिति मर्यादित छोटेबेठिया ने की। उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि यह प्रशिक्षण क्षेत्र के किसानों के लिए अत्यंत लाभकारी सिद्ध होगा और इससे ग्रामीणों को नई दिशा मिलेगी। विशेष अतिथि के रूप में उपस्थित रहे सविता नायक, सरपंच छोटेबेठिया, संदीप मिंज, सरपंच बेलगाल, विजय पटनायक, कार्यक्रम प्रभारी, खुलेश रावटे, परिक्षेत्र सहायक एवं बापी मंडल, प्रबंधक ने किसानों को लाख पालन अपनाने, सरकारी योजनाओं का लाभ लेने तथा समूह बनाकर कार्य करने की सलाह दी।
ग्रामीणों के लिए अवसर और भविष्य की संभावनाएं
लाख पालन न केवल एक पारंपरिक गतिविधि है, बल्कि यह आधुनिक समय में आर्थिक उन्नति का सशक्त साधन बन चुका है। इस प्रशिक्षण शिविर के माध्यम से ग्रामीणों को यह समझने का अवसर मिला कि वे अपने आसपास उपलब्ध संसाधनों का उपयोग करके कैसे अपनी आय बढ़ा सकते हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, लाख पालन से किसान साल में दो बार उत्पादन कर सकते हैं और इससे उन्हें अतिरिक्त आय प्राप्त होती है। साथ ही, यह गतिविधि पर्यावरण के अनुकूल भी है, क्योंकि इसमें पेड़ों का संरक्षण एवं संवर्धन होता है। इस अवसर पर बड़ी संख्या में किसान, ग्रामीण एवं जनप्रतिनिधि उपस्थित थे।




