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पखांजुर/ रवींद्र–नजरुल सांस्कृतिक संध्या का भव्य आयोजन, मेधावी छात्र-छात्राओं का हुआ सम्मान।

Sub Headline: रवीन्द्रनाथ टैगोर और काजी नजरुल इस्लाम की जयंती पर सजी सांस्कृतिक महफिल, साहित्य और कला के रंग में रंगा पखांजूर।

रवींद्र–नजरुल सांस्कृतिक संध्या का भव्य आयोजन, मेधावी छात्र-छात्राओं का हुआ सम्मान।

पखांजूर। जागृति मंच पखांजूर द्वारा बंग समाज दुर्गा प्रांगण में रवीन्द्रनाथ टैगोर एवं काजी नजरुल इस्लाम की जयंती के उपलक्ष्य में भव्य “रवींद्र–नजरुल सांस्कृतिक संध्या” कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में साहित्य, संस्कृति, संगीत एवं नृत्य की मनमोहक प्रस्तुतियों ने दर्शकों का मन मोह लिया।

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि सुरंजन पाल एवं विशेष अतिथि कृषनेन्दु आईच, अशित मंडल, कमलेश बाला, सुभाष चंद्र राय, दीपक सरकार, बीना चक्रवर्ती एवं शिप्रा शील उपस्थित रहे। अतिथियों का स्वागत बैज पहनाकर किया गया। इसके पश्चात सभी अतिथियों ने रवीन्द्रनाथ टैगोर एवं काजी नजरुल इस्लाम के छायाचित्रों पर पुष्पमाला अर्पित कर श्रद्धांजलि दी।

मंच के उपाध्यक्ष ऋषिकेश मजूमदार ने वर्षों से सहयोग देने वाले सभी नागरिकों एवं अतिथियों का स्वागत करते हुए आभार व्यक्त किया। कार्यक्रम का शुभारंभ मंच के सदस्यों द्वारा रवीन्द्रनाथ ठाकुर रचित गीत “हे नूतन, देखा दिक आरबार” एवं जन्मदिन उद्बोधन संगीत की प्रस्तुति से हुआ।
इस अवसर पर छत्तीसगढ़ माध्यमिक शिक्षा मंडल की कक्षा 12वीं परीक्षा में प्रदेश की टॉप-10 सूची में दसवां स्थान प्राप्त करने वाली कुमारी अपर्णा विश्वास तथा कक्षा 10वीं में कांकेर जिले में सातवां स्थान प्राप्त करने वाले मेधावी विद्यार्थियों को जागृति मंच पखांजूर की ओर से स्मृति चिन्ह, प्रशस्ति पत्र एवं मिठाई भेंट कर सम्मानित किया गया।

कार्यक्रम में कोलकाता से आए विशेष अतिथि अशित मंडल ने रवीन्द्रनाथ ठाकुर एवं काजी नजरुल इस्लाम के साहित्य, भाषा, देशप्रेम और सामाजिक परिवर्तन से जुड़े आधुनिक वैचारिक योगदान पर विस्तार से अपने विचार रखे। उन्होंने कहा कि बांग्ला भाषा विश्व में सातवें स्थान पर बोली जाने वाली भाषा है तथा मातृभाषा केवल संवाद का माध्यम नहीं, बल्कि सामाजिक एवं वैश्विक समस्याओं के समाधान में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। उन्होंने कहा कि रवींद्रनाथ और नजरुल ने अपने साहित्य एवं विचारों से देश और दुनिया को नई दिशा दी, जो आज भी प्रेरणा का स्रोत बने हुए हैं।
सांस्कृतिक कार्यक्रम में रवींद्र संगीत की प्रस्तुति विप्लव अधिकारी, सोमा विश्वास, चित्त मजूमदार, सीमा समद्दार, कल्पना चंद, दीक्षा राय, सुमित मंडल, जय राय, अंजु हालदार एवं तनुश्री ने दी। वहीं नजरुल गीति की प्रस्तुति श्यामल महोलदार, दीपेंद्र लाल राय एवं सृष्टि शर्मिष्ठा सरकार द्वारा दी गई।

रवींद्र–नजरुल नृत्य की प्रस्तुति रीना, दीक्षा, निशा, अरुणा, असुज हालदार, सुप्रिया विश्वास ने दी। कविता आबृत्ति में देबस्मिता साहा, अंजली दास, बनानी आईच, ज्योत्सना अधिकारी एवं बीना चक्रवर्ती ने शानदार प्रस्तुति देकर दर्शकों की खूब सराहना बटोरी।
कार्यक्रम का संचालन प्रणब कीर्तनिया एवं रथिन्द्रनाथ बनर्जी ने किया। कार्यक्रम में भाग लेने वाले सभी कलाकारों को मोमेंटो भेंट कर सम्मानित किया गया।
वाद्ययंत्र सहयोग में ऑक्टोपैड पर सुकलाल विश्वास, की-बोर्ड पर अमृत विश्वास, तबला पर सुब विश्वास तथा गिटार पर सुमित मंडल ने संगत दी।
अंत में मंच सचिव निवास अधिकारी ने सभी कलाकारों, मेधावी छात्र-छात्राओं, मुख्य अतिथि, विशेष अतिथियों एवं कार्यक्रम को सफल बनाने में सहयोग करने वाले सभी लोगों का आभार व्यक्त करते हुए कार्यक्रम के समापन की घोषणा की।

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