
पैरावट से गिरने पर टूटा था कंधा, तभी ठान लिया था डॉक्टर बनना

नारायणपुर / छोटेडोंगर। अगर इंसान के अंदर कुछ करने का जुनून और लगन हो, तो कोई भी बाधा उसका रास्ता नहीं रोक सकती। हम बात कर रहे हैं एक गरीब परिवार के उस होनहार युवक की, जिसकी जिंदगी एक हादसे के बाद पूरी तरह बदल गई। छोटेडोंगर के लेगड़ीबाई निवासी चंद्रेश पात्र, पिता अंतूराम पात्र, की डॉक्टर बनने की दृढ़ इच्छाशक्ति और कड़ी मेहनत आखिरकार रंग लाई।
डॉ. चंद्रेश पात्र बताते हैं कि उनकी प्रारंभिक शिक्षा कक्षा पहली से लेकर दसवीं तक छोटेडोंगर में हुई। कक्षा दसवीं में उन्होंने पूरे स्कूल में टॉप किया। इसके बाद वे इंजीनियर बनना चाहते थे, लेकिन इसी दौरान घर की पैरावट से गिरने के कारण उनका कंधा टूट गया। ठीक होने में लगभग एक वर्ष का समय लगा। इसी घटना के बाद उन्होंने ठान लिया कि उन्हें एक अच्छा डॉक्टर बनना है।
दसवीं की पढ़ाई पूरी करने के बाद आगे की शिक्षा के लिए उन्होंने शासकीय बालक उच्चतर माध्यमिक विद्यालय नारायणपुर में प्रवेश लिया। 11वीं और 12वीं की पढ़ाई पूरी करने के बाद वे नीट की तैयारी के लिए भिलाई गए। इसी दौरान नीट परीक्षा से ठीक एक महीने पहले होली में रंग-गुलाल खेलते समय उनका पैर टूट गया। इस बार भी उन्हें पूरी तरह स्वस्थ होने में लगभग एक वर्ष लग गया।
स्वस्थ होने के बाद वर्ष 2017 में चंद्रेश ने नीट परीक्षा पास कर ली, लेकिन किसी कारणवश उनका चयन मेडिकल कॉलेज में नहीं हो पाया। इससे वे काफी मायूस हुए, लेकिन परिवार और मित्रों ने उनका हौसला बढ़ाया और दोबारा प्रयास करने के लिए प्रेरित किया।
चंद्रेश ने हार नहीं मानी और फिर से नीट की तैयारी शुरू कर दी। आखिरकार वर्ष 2020 में उनका चयन में हो गया। अब एमबीबीएस की पढ़ाई पूरी कर चंद्रेश एक डॉक्टर बन चुके हैं।
चंद्रेश बताते हैं कि स्कूल की छुट्टियों के दौरान वे अपने मवेशियों को खेतों में चराने ले जाते थे और पिता के साथ खेती-किसानी में भी हाथ बंटाते थे। आर्थिक स्थिति कमजोर होने के कारण वे कई बार बिना चप्पल पहने ही स्कूल जाया करते थे।
उनकी इस उपलब्धि पर क्षेत्र में खुशी का माहौल है। सोशल मीडिया पर लोग उन्हें लगातार बधाइयाँ दे रहे हैं, वहीं परिवार भी उनकी मेहनत और सफलता से बेहद खुश है।




