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भानुप्रतापपुर/ सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में कथित अनियमितताओं का मामला, जांच की मांग तेज।

जीएसटी पंजीयन एवं रिटर्न से जुड़े पहलुओं की भी जांच की मांग की गई है।

भानुप्रतापपुर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में कथित अनियमितताओं का मामला, जांच की मांग तेज।

बस्तर टाइम्स न्यूज, भानुप्रतापपुर/ सूचना के अधिकार (आरटीआई) के तहत प्राप्त दस्तावेजों के आधार पर भानुप्रतापपुर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में लैबोरेटरी स्थापना एवं चिकित्सा सामग्री खरीदी में कथित अनियमितताओं और भ्रष्टाचार के आरोप सामने आए हैं। मामले को लेकर क्षेत्र में चर्चा का विषय बना हुआ है तथा जांच की मांग उठने लगी है।

प्राप्त जानकारी के अनुसार आदिवासी विभाग से प्राप्त आबंटित राशि के माध्यम से सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र भानुप्रतापपुर में आधुनिक लैबोरेटरी की स्थापना की जानी थी। आरोप है कि निर्धारित प्रक्रिया एवं जेम (GeM) पोर्टल के माध्यम से खरीदी करने के बजाय कोटेशन आधारित प्रक्रिया अपनाई गई, जिससे शासन की पारदर्शी खरीदी व्यवस्था पर सवाल खड़े हो रहे हैं।

भानुप्रतापपुर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र क्षेत्र का प्रमुख स्वास्थ्य केंद्र है, जहां भानुप्रतापपुर, अंतागढ़, दुर्गूकोंदल, पखांजूर सहित आसपास के हजारों ग्रामीण बेहतर उपचार की उम्मीद लेकर पहुंचते हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि पर्याप्त जांच सुविधाओं के अभाव में कई मरीजों को जिला मुख्यालय अथवा राजधानी रेफर करना पड़ता है, जिससे आम जनता को आर्थिक और मानसिक परेशानियों का सामना करना पड़ता है।

आरटीआई कार्यकर्ता एवं छात्र नेता सितेश हिड़को ने आरोप लगाया है कि लैबोरेटरी स्थापना एवं चिकित्सा उपकरणों की खरीदी में गंभीर अनियमितताएं हुई हैं। उनका दावा है कि लगभग 20 से 30 हजार रुपये मूल्य की सामग्री को कई गुना अधिक कीमत पर खरीदा गया तथा सप्लाई किए गए उपकरणों और सामग्री की गुणवत्ता भी निर्धारित मानकों के अनुरूप नहीं पाई गई।
आरोपों के अनुसार खरीदी प्रक्रिया में दुबे कृषि सेवा केंद्र, नरेंद्र ट्रेडर्स तथा धीरेंद्र ट्रेडर्स नामक फर्मों के माध्यम से कोटेशन प्रस्तुत किए गए।
शिकायतकर्ताओं का कहना है कि इन फर्मों की वास्तविक गतिविधियों, कार्यालय और कारोबार संबंधी दस्तावेजों की भी निष्पक्ष जांच की जानी चाहिए। साथ ही जीएसटी पंजीयन एवं रिटर्न से जुड़े पहलुओं की भी जांच की मांग की गई है।
शिकायतकर्ताओं ने यह भी आरोप लगाया है कि अस्पताल प्रशासन, संबंधित विभागों एवं अन्य जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका की जांच आवश्यक है। उनका कहना है कि यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो दोषियों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई की जानी चाहिए ताकि भविष्य में स्वास्थ्य सुविधाओं से जुड़े कार्यों में पारदर्शिता बनी रहे।

क्षेत्र के सामाजिक संगठनों एवं नागरिकों ने शासन-प्रशासन से उच्चस्तरीय जांच समिति गठित कर पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने तथा दोषियों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई करने की मांग की है। उनका कहना है कि स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़े मामलों में किसी भी प्रकार की लापरवाही या भ्रष्टाचार सीधे आम जनता के हितों को प्रभावित करता है।

फिलहाल संबंधित विभागों की ओर से आरोपों पर आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। जांच के बाद ही मामले की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।

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