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भानुप्रतापपुर/ आईआईएससी प्रशिक्षण हेतु डॉ. मंसूरी का चयन, शोध को मिलेगा नया आयाम।

आईआईएससी प्रशिक्षण हेतु डॉ. मंसूरी का चयन, शोध को मिलेगा नया आयाम।

भानुप्रतापपुर @ 20 मार्च। शासकीय महर्षि वाल्मीकि स्नातकोत्तर महाविद्यालय, भानुप्रतापपुर के प्राणीशास्त्र विभाग के वरिष्ठ प्राध्यापक डॉ. नसीम अहमद मंसूरी का चयन देश के प्रतिष्ठित एवं सबसे बेहतरीन संस्थाओं में से एक भारतीय विज्ञान संस्थान में आयोजित विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम के लिए हुआ है।

यह प्रशिक्षण राष्ट्रीय उच्चत्तर शिक्षा अभियान (RUSA) छत्तीसगढ़ के तत्वाधान में विज्ञान संकाय के प्राध्यापकों के लिए आयोजित किया जा रहा है। कार्यक्रम का आयोजन 23 मार्च से 7 अप्रैल तक कर्नाटक के स्किल डेवलपमेंट केंद्र खुदाओपुरा तथा चल्लकेरे कैंपस, बेंगलुरु में किया जाएगा। प्रशिक्षण के दौरान प्राध्यापकों को नवीनतम शिक्षण तकनीकों, उन्नत शोध पद्धतियों, आधुनिक प्रयोगशाला उपकरणों के उपयोग, नवाचार आधारित शिक्षण तथा विषय से संबंधित अद्यतन जानकारी प्रदान की जाएगी।

महाविद्यालय की प्राचार्य डॉ. रश्मि सिंह ने इस उपलब्धि पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि डॉ. मंसूरी का चयन हमारे महाविद्यालय के लिए अत्यंत गर्व का विषय है। यह प्रशिक्षण न केवल उनके व्यक्तिगत शैक्षणिक विकास में सहायक होगा, बल्कि इसके माध्यम से वे जो ज्ञान और अनुभव प्राप्त करेंगे, वह निश्चित रूप से हमारे विद्यार्थियों और पूरे संस्थान के लिए लाभकारी सिद्ध होगा। आज के समय में उच्च शिक्षा में गुणवत्ता और शोध की महत्ता लगातार बढ़ रही है, ऐसे में इस प्रकार के प्रशिक्षण कार्यक्रम प्राध्यापकों को नई दिशा और दृष्टिकोण प्रदान करते हैं। हमें विश्वास है कि उनके अनुभवों से महाविद्यालय का शैक्षणिक वातावरण और अधिक समृद्ध एवं प्रेरणादायक बनेगा।
उन्होंने यह भी कहा कि संस्था हमेशा अपने प्राध्यापकों को नवाचार और शोध के लिए प्रोत्साहित करती रही है और भविष्य में भी ऐसे अवसरों का अधिकतम लाभ उठाने का प्रयास किया जाएगा, जिससे विद्यार्थियों को आधुनिक एवं गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिल सके।

वहीं डॉ. नसीम अहमद मंसूरी ने अपने चयन पर आभार व्यक्त करते हुए कहा यह मेरे लिए एक महत्वपूर्ण अवसर है, जहां मुझे देश के अग्रणी वैज्ञानिकों और विशेषज्ञों से सीखने का मौका मिलेगा। इस प्रशिक्षण का मुख्य उद्देश्य शोध कार्यों में नवीनतम टूल्स और तकनीकों का उपयोग करना सीखना है, ताकि हम समाज के लिए उपयोगी और प्रभावी शोध कर सकें। आज के दौर में शोध केवल अकादमिक सीमा तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका सीधा संबंध समाज के विकास और समस्याओं के समाधान से है।
उन्होंने ये भी बताया कि इस प्रशिक्षण के माध्यम से वे आधुनिक प्रयोगशाला तकनीकों, डेटा विश्लेषण के नए तरीकों तथा इंटरडिसिप्लिनरी रिसर्च के महत्व को गहराई से समझेंगे। मैं प्रयास करूंगा कि यहां से प्राप्त ज्ञान को महाविद्यालय में लागू कर विद्यार्थियों को शोध के प्रति प्रेरित करूं और उन्हें नवीन तकनीकों से परिचित कराऊं, ताकि वे भविष्य में बेहतर शोधकर्ता बन सकें।
महाविद्यालय के अन्य प्राध्यापकों एवं विद्यार्थियों ने भी डॉ. मंसूरी को इस उपलब्धि के लिए बधाई दी है और उनके सफल प्रशिक्षण की कामना की है।

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