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पखांजुर/ सनसनीखेज खुलासा: खुद गिरकर रची थी जानलेवा हमले की झूठी कहानी, पुलिस के सामने मांगनी पड़ी माफी।

सनसनीखेज खुलासा: खुद गिरकर रची थी जानलेवा हमले की झूठी कहानी, पुलिस के सामने मांगनी पड़ी माफी।

पखांजूर/ पत्रकारिता जैसे सम्मानजनक पेशे को कलंकित करने और पुलिस प्रशासन को झूठी शिकायत देकर गुमराह करने वाले एक तथाकथित ‘फर्जी पत्रकार’ के कारनामों का पखांजूर पुलिस ने पर्दाफाश कर दिया है। खुद को पत्रकार बताने वाले किशोर बाला नाम के युवक ने बीते दिनों थाने में शिकायत दर्ज कराई थी कि उन पर जानलेवा हमला हुआ है, लेकिन जांच में यह मामला पूरी तरह फर्जी पाया गया।
क्या था पूरा मामला?
हाल ही में किशोर बाला ने सोशल मीडिया और अखबारों में यह खबर फैलवाई थी कि जब वह अपने घर लौट रहे थे, तब एक अज्ञात हमलावर ने उन पर लोहे की पाइप से हमला किया। उन्होंने दावा किया था कि इस हमले में वह बाल-बाल बचे और गंभीर रूप से घायल हो गए। इस खबर के बाद स्थानीय पत्रकार जगत और आम जनता में सुरक्षा को लेकर चिंता व्याप्त हो गई थी।
CCTV ने खोली ‘हमले’ की पोल
मामले की गंभीरता को देखते हुए पखांजूर पुलिस ने जब घटनास्थल के आसपास के CCTV फुटेज खंगाले, तो हकीकत कुछ और ही निकली। फुटेज में साफ देखा गया कि किशोर बाला पर किसी ने कोई हमला नहीं किया था, बल्कि वह खुद ही अपनी मोटरसाइकिल से अनियंत्रित होकर गिर गए थे। अपनी इस दुर्घटना को उन्होंने ‘सुनियोजित हमले’ का रूप देकर पुलिस में झूठी एफआईआर दर्ज कराने की कोशिश की।
थाने में मांगी माफी, पुलिस की सख्त चेतावनी
सच सामने आने के बाद, फर्जी पत्रकार किशोर बाला को थाने तलब किया गया। वायरल हो रही तस्वीरों में साफ देखा जा सकता है कि वह पुलिस अधिकारियों के सामने हाथ जोड़कर अपनी गलती की माफी मांग रहे हैं। पुलिस प्रशासन ने इस मामले में कड़ा रुख अपनाते हुए आरोपी को सख्त चेतावनी दी है कि भविष्य में यदि वह दोबारा फर्जी तरीके से खुद को पत्रकार बताकर घूमते या लोगों को डराते-धमकाते पाए गए, तो उन पर कठोर कानूनी कार्रवाई की जाएगी। पत्रकारिता के नाम पर अवैध वसूली या गलत जानकारी फैलाने वालों को बख्शा नहीं जाएगा।
असली पत्रकारों की छवि को नुकसान
क्षेत्र के वरिष्ठ और वास्तविक पत्रकारों का कहना है कि किशोर बाला जैसे लोग न केवल प्रशासन का समय बर्बाद करते हैं, बल्कि समाज के ‘चौथे स्तंभ’ की विश्वसनीयता को भी ठेस पहुँचाते हैं। इस तरह के फर्जी पत्रकारों के कारण ही ईमानदारी से काम करने वाले फील्ड पत्रकारों को भी शक की निगाह से देखा जाता है।

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