भानुप्रतापपुर/ गोदावरी माइंस को लाभ पहुँचाने के लिए वृक्ष गणना में भारी हेराफेरी का आरोप, शिवसेना ने डीएफओ को सौंपा ज्ञापन।

गोदावरी माइंस को लाभ पहुँचाने के लिए वृक्ष गणना में भारी हेराफेरी का आरोप, शिवसेना ने डीएफओ को सौंपा ज्ञापन।
भानुप्रतापपुर @ 19 मई 2026/ शिवसेना पार्टी के प्रदेश महासचिव चंद्रमौली मिश्रा ने पूर्व वन मंडल भानुप्रतापपुर के डीएफओ को एक शिकायती पत्र सौंपकर ग्राम पंचायत परेंकोडो में गोदावरी माइंस के ‘वेस्ट डंपिंग’ प्रोजेक्ट के नाम पर नियमों की धज्जियां उड़ाने का आरोप लगाया है। शिवसेना नेता ने इस मामले में वन और राजस्व विभाग की संयुक्त टीम पर कंपनी के साथ साठगांठ करने तथा तथ्यों को छुपाने के गंभीर आरोप लगाते हुए उच्च स्तरीय जांच की मांग की है।
शिकायत पत्र के अनुसार, तहसील दुर्गूकोंदल जिला कांकेर के अंतर्गत ग्राम पंचायत परेंकोडो में खसरा क्रमांक 188/1, 247/1 एवं 247/2 की कुल 60.84 हेक्टेयर भूमि को गोदावरी माइंस द्वारा वेस्ट डंपिंग के लिए उपयोग में लाया जाना प्रस्तावित है। इस हेतु वन एवं राजस्व विभाग के संयुक्त दल द्वारा हाल ही में वृक्ष गणना (Tree Survey) की कार्रवाई की गई थी। शिवसेना का आरोप है कि यह पूरी प्रक्रिया प्रथम दृष्टया दोषपूर्ण है और इसमें निजी कंपनी को अनुचित लाभ पहुँचाने का प्रयास किया गया है।
शिवसेना द्वारा उठाए गए मुख्य बिंदु और गंभीर अनियमिताएं।
खसरों की अवैध क्लबिंग: सर्वे टीम ने तीनों अलग-अलग खसरों को आपस में जोड़कर (क्लबिंग करके) एकमुश्त वृक्ष गणना रिपोर्ट प्रस्तुत कर दी है। जबकि नियमतः प्रत्येक खसरे का क्षेत्रफल, भौगोलिक स्वरूप और वनस्पति घनत्व अलग होने के कारण उनकी पृथक-पृथक रिपोर्ट तैयार की जानी चाहिए थी। आरोप है कि ऐसा करके अधिक घनत्व वाले वन क्षेत्र की वास्तविक स्थिति को छुपाया गया है।
11,984 वृक्षों की मौजूदगी: उक्त क्षेत्र में लगभग 11,984 वृक्ष मौजूद हैं, जो खुद इस बात का प्रमाण है कि यह क्षेत्र पर्यावरणीय दृष्टि से बेहद संवेदनशील और वृक्षाच्छादित है।
सुप्रीम कोर्ट के ऐतिहासिक फैसले का उल्लंघन: पत्र में माननीय सर्वोच्च न्यायालय द्वारा टी.एन. गोदावर्मन थिरुमुलपाद बनाम भारत संघ मामले में दिए गए फैसले का हवाला दिया गया है। कोर्ट के अनुसार, किसी भूमि को केवल राजस्व रिकॉर्ड के आधार पर नहीं, बल्कि उसके वास्तविक भौतिक स्वरूप के आधार पर ‘वन’ (Deemed Forest) माना जाना चाहिए। रिपोर्ट में कैनोपी घनत्व (VDF/MDF/OF) का कोई वैज्ञानिक विश्लेषण नहीं किया गया है, जो एक गंभीर कानूनी त्रुटि है।
पारिस्थितिकी (Ecology) को खतरा: यदि राजस्व रिकॉर्ड में यह भूमि “पहाड़ चट्टान” के रूप में दर्ज है, तब भी धरातल पर करीब 12 हजार पेड़ों की मौजूदगी इसे एक समृद्ध इको-सिस्टम बनाती है। यहाँ वेस्ट डंपिंग करने से नीचे स्थित कृषि भूमि, जल स्रोत और स्थानीय वन्यजीव पूरी तरह तबाह हो जाएंगे।*
7 दिनों का अल्टीमेटम, वरना जाएंगे NGT
शिवसेना के प्रदेश महासचिव चंद्रमौली मिश्रा ने विभाग से मांग की है कि वर्तमान वृक्ष गणना रिपोर्ट को तत्काल निरस्त किया जाए और जब तक वैज्ञानिक पद्धति से दोबारा निष्पक्ष सर्वेक्षण न हो, तब तक कंपनी को किसी भी प्रकार की डंपिंग की अनुमति न दी जाए।
*प्रशासन को कड़ा अल्टीमेटम देते हुए कहा गया है कि यदि इस शिकायत पर 7 दिनों के भीतर उचित संज्ञान लेकर ठोस कार्रवाई नहीं की गई, तो शिवसेना माननीय नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) एवं अन्य सक्षम न्यायिक मंचों की शरण में जाने के लिए विवश होगी, जिसकी संपूर्ण जिम्मेदारी शासन-प्रशासन की होगी।*




