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बलरामपुर/ नेटवर्क नहीं, नोटिस तैयार: राजपुर BEO के आदेश से शिक्षकों में नाराजगी, तकनीकी समस्या पर वेतन कटौती की चेतावनी।

नेटवर्क नहीं, नोटिस तैयार: राजपुर BEO के आदेश से शिक्षकों में नाराजगी, तकनीकी समस्या पर वेतन कटौती की चेतावनी।

बलरामपुर। बलरामपुर जिले के राजपुर विकासखंड में शिक्षा विभाग का एक आदेश इन दिनों चर्चा का विषय बना हुआ है। विकासखंड शिक्षा अधिकारी (BEO) द्वारा कुछ शिक्षकों को उपस्थिति दर्ज कराने में देरी के कारण कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है। नोटिस में तीन दिनों के भीतर संतोषजनक जवाब प्रस्तुत नहीं करने पर वेतन कटौती की कार्रवाई की चेतावनी दी गई है।

जानकारी के अनुसार, शासन के निर्देशानुसार शिक्षकों को विद्यालय पहुंचने के बाद विद्या समीक्षा केंद्र (VSK) ऐप तथा GPS कैमरा ऐप के माध्यम से अपनी उपस्थिति दर्ज करानी होती है। हालांकि शिक्षकों का कहना है कि बलरामपुर जिले के कई ग्रामीण क्षेत्रों में नेटवर्क की समस्या लंबे समय से बनी हुई है, जिसके कारण ऑनलाइन उपस्थिति दर्ज करने में अक्सर कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है।

 

शिक्षकों के मुताबिक, जिस दिन संबंधित नोटिस जारी किया गया, उस दिन GPS कैमरा ऐप बार-बार अपडेट की मांग कर रहा था, जिससे वह सुचारु रूप से कार्य नहीं कर पा रहा था। वहीं कमजोर इंटरनेट कनेक्टिविटी के कारण फोटो और लोकेशन अपलोड होने में भी विलंब हुआ। उनका कहना है कि विद्यालय में प्रार्थना सभा और अन्य प्रारंभिक गतिविधियों में भी समय लगता है, जिसके चलते तकनीकी बाधाओं के कारण उपस्थिति दर्ज करने में लगभग 11 मिनट की देरी हुई।

शिक्षकों का आरोप है कि तकनीकी समस्याओं और नेटवर्क बाधाओं को ध्यान में रखने के बजाय सीधे कारण बताओ नोटिस जारी करना उचित नहीं है। उनका कहना है कि यदि समस्या विभागीय ऐप या इंटरनेट कनेक्टिविटी से जुड़ी है, तो इसके लिए शिक्षकों को जिम्मेदार ठहराना न्यायसंगत नहीं होगा।

उल्लेखनीय है कि बलरामपुर जिले के कई ग्रामीण इलाकों में मोबाइल नेटवर्क और इंटरनेट सेवाओं की कमजोर स्थिति को लेकर पहले भी शिकायतें सामने आती रही हैं। ऐसे में शिक्षकों का मानना है कि ऑनलाइन उपस्थिति प्रणाली लागू करते समय स्थानीय परिस्थितियों और तकनीकी चुनौतियों को भी ध्यान में रखा जाना चाहिए।

इस मामले को लेकर शिक्षक संगठनों और शिक्षकों में नाराजगी देखी जा रही है। उनका कहना है कि विभाग को तकनीकी समस्याओं के समाधान पर ध्यान देना चाहिए, न कि शिक्षकों पर दंडात्मक कार्रवाई का दबाव बनाना चाहिए।

अब सभी की निगाहें जिला प्रशासन और शिक्षा विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों पर टिकी हैं। देखना होगा कि वे इस मामले में हस्तक्षेप कर तकनीकी समस्याओं का समाधान निकालते हैं या फिर शिक्षकों को ही इसका खामियाजा भुगतना पड़ेगा।

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