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रायपुर/ कुशाभाऊ ठाकरे पत्रकारिता विश्वविद्यालय में अभाविप का प्रदर्शन, 15 सूत्रीय मांगों को लेकर कुलपति कार्यालय का घेराव।

बर्खास्त प्राध्यापक की कथित पुनः नियुक्ति, 7 करोड़ के ऑडिटोरियम की गुणवत्ता और छात्र सुविधाओं में अनियमितताओं को लेकर एबीवीपी का विरोध।

कुशाभाऊ ठाकरे पत्रकारिता विश्वविद्यालय में अभाविप का प्रदर्शन, 15 सूत्रीय मांगों को लेकर कुलपति कार्यालय का घेराव।

रायपुर, 2 जून 2026। अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (अभाविप) ने मंगलवार को के नेतृत्व में में कथित प्रशासनिक अनियमितताओं, छात्र हितों से जुड़े मुद्दों तथा निर्माण कार्यों में भ्रष्टाचार के आरोपों को लेकर प्रदर्शन किया। इस दौरान कार्यकर्ताओं ने विश्वविद्यालय परिसर में रैली निकालकर कुलपति कार्यालय का घेराव किया और 15 सूत्रीय मांगों का ज्ञापन सौंपा।

अभाविप ने आरोप लगाया कि सर्वोच्च न्यायालय के आदेश एवं विश्वविद्यालय प्रशासन द्वारा सेवा समाप्ति की कार्रवाई के बावजूद पूर्व एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. शाहिद अली को बिना किसी वैधानिक आदेश के पुनः विश्वविद्यालय में प्रवेश और कार्य करने की अनुमति दी गई है। परिषद ने इस मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की। साथ ही वर्ष 2019 में डॉ. शैलेन्द्र खण्डेलवाल की नियुक्ति प्रक्रिया की भी जांच कराए जाने की मांग उठाई गई।

प्रदर्शन के दौरान अभाविप ने विश्वविद्यालय परिसर में लगभग सात करोड़ रुपये की लागत से निर्मित नए ऑडिटोरियम की वर्तमान स्थिति पर भी सवाल खड़े किए। परिषद का आरोप है कि उद्घाटन के कुछ समय बाद ही भवन में क्षति के संकेत दिखाई देने लगे हैं, जिससे निर्माण कार्य की गुणवत्ता और संभावित अनियमितताओं को लेकर संदेह उत्पन्न होता है। संगठन ने इसकी उच्च स्तरीय तकनीकी जांच कराने की मांग की है।

 

छात्रों से जुड़े मुद्दों को उठाते हुए अभाविप ने कहा कि पाठ्यक्रमों के नाम परिवर्तन से विद्यार्थियों में भ्रम की स्थिति बनी हुई है। इसके अलावा परीक्षा अवधि के दौरान बार-बार बिजली बाधित होने, छात्रावासों में दूषित पेयजल की समस्या, मेस की निम्न गुणवत्ता, खेल सुविधाओं के अभाव, विश्वविद्यालय बस सेवा की अव्यवस्था तथा करोड़ों रुपये की लागत से निर्मित स्टूडियो सुविधाओं का विद्यार्थियों को लाभ नहीं मिल पाने जैसे विषय भी आंदोलन के प्रमुख मुद्दे रहे।

अभाविप के प्रदेश मंत्री ने कहा कि विश्वविद्यालय शिक्षा और अकादमिक उत्कृष्टता का केंद्र होना चाहिए, न कि अनियमितताओं और भ्रष्टाचार को संरक्षण देने का माध्यम। उन्होंने कहा कि यदि सेवा समाप्ति के आदेश के बाद भी किसी व्यक्ति को विश्वविद्यालय में कार्य करने की अनुमति दी जाती है तो यह प्रशासनिक पारदर्शिता पर गंभीर प्रश्न खड़े करता है। उन्होंने संबंधित मामलों की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई की मांग की।

वहीं अभाविप के रायपुर महानगर मंत्री एवं विश्वविद्यालय छात्र ने कहा कि करोड़ों रुपये की लागत से निर्मित ऑडिटोरियम की स्थिति निर्माण कार्य की गुणवत्ता पर सवाल खड़े करती है। उन्होंने छात्रावासों में शुद्ध पेयजल, स्वच्छ शौचालय, निर्धारित स्थानों पर इंडक्शन उपयोग की अनुमति तथा आधुनिक स्टूडियो सुविधाओं को विद्यार्थियों के लिए तत्काल शुरू किए जाने की मांग भी रखी।

कई घंटों तक चले प्रदर्शन और घेराव के बाद विश्वविद्यालय के कुलसचिव ने अभाविप प्रतिनिधिमंडल से चर्चा की। चर्चा के दौरान डॉ. शाहिद अली से जुड़े मामले की जांच, ऑडिटोरियम निर्माण कार्य की तकनीकी जांच तथा विद्यार्थियों की अन्य समस्याओं के समाधान के लिए आवश्यक कदम उठाने का आश्वासन दिया गया।

अभाविप ने कहा कि विश्वविद्यालय प्रशासन के आश्वासन का सम्मान करते हुए फिलहाल आंदोलन स्थगित किया जा रहा है। हालांकि परिषद ने चेतावनी दी है कि यदि निर्धारित समयावधि में मांगों पर ठोस कार्रवाई नहीं की गई तो शिक्षा मंत्री और राज्यपाल को ज्ञापन सौंपकर व्यापक आंदोलन किया जाएगा, जिसकी जिम्मेदारी विश्वविद्यालय प्रशासन की होगी।

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