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कांकेरकापसीछत्तीसगढ़

कापसी/ फरवरी में जमा किए 3500 रूपए, जून की दुर्घटना के बाद काटी रसीद! बिजली विभाग पर गबन, लापरवाही और साजिश के गंभीर आरोप।

अस्थायी कृषि पंप कनेक्शन के नाम पर किसानों से वसूली, रसीद नहीं देने का आरोप; हादसे में युवक की मौत के बाद खुला मामला।

फरवरी में जमा किए ₹3500, जून की दुर्घटना के बाद काटी रसीद! बिजली विभाग पर गबन, लापरवाही और साजिश के गंभीर आरोप।

बस्तर टाइम्स न्यूज, कापसी/ कांकेर जिले के परलकोट क्षेत्र से बिजली विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करने वाला मामला सामने आया है। बड़ेकापसी निवासी किसान दयाराम भुआर्य ने छत्तीसगढ़ राज्य विद्युत वितरण कंपनी के प्रबंध निदेशक को लिखित शिकायत भेजकर कापसी बिजली विभाग के कर्मचारियों और अधिकारियों पर अस्थायी (टी.सी.) कृषि पंप कनेक्शन के नाम पर किसानों से राशि लेकर उसे विभाग में जमा नहीं करने, रसीद जारी नहीं करने तथा पूरे मामले को दबाने के प्रयास का गंभीर आरोप लगाया है।

सबसे चिंताजनक बात यह है कि जिस अस्थायी विद्युत कनेक्शन के लिए फरवरी 2026 में राशि जमा करने का दावा किया गया है, उसी कनेक्शन से 12 जून 2026 को हुई विद्युत दुर्घटना में मनीष भुआर्य की मौत हो गई। दुर्घटना के बाद जब मामला पुलिस और प्रशासन तक पहुंचा तो किसान रसीद के लिए कापसी बिजली विभाग के चक्कर काटता रहा। आरोप है कि विभाग ने तत्काल रसीद देने के बजाय 24 जून 2026 की तारीख में कम राशि की रसीद जारी कर पूरे मामले को संदेहास्पद बना दिया।

रसीद में गड़बड़ी पर उठे सवाल।

24 जून को काटे गए रशीद

शिकायत के अनुसार दयाराम भुआर्य और उनके साथी किसान भरोस सलाम ने फरवरी 2026 में विद्युत केंद्र कापसी के कर्मचारी कार्तिक उसेंडी को अस्थायी कृषि पंप कनेक्शन के लिए ₹3500-₹3500 दिए थे। आरोप है कि पैसे लेने के बाद कोई रसीद नहीं दी गई और बार-बार कार्यालय आने पर भी केवल “दो-तीन दिन बाद रसीद मिल जाएगी” कहकर टाल दिया गया।

किसान का आरोप है कि हादसे के बाद विभाग ने स्वयं को बचाने के लिए फरवरी में जमा राशि की जगह जून महीने की तारीख वाली मात्र ₹2030 की रसीद जारी कर दी, जबकि दूसरा किसान आज तक रसीद से वंचित है। इससे पूरे मामले में वित्तीय अनियमितता और रिकॉर्ड में हेरफेर की आशंका और गहरा गई है।

पूरे परलकोट क्षेत्र में अनियमितता का आरोप

शिकायत में यह भी आरोप लगाया गया है कि परलकोट क्षेत्र में हर वर्ष बड़ी संख्या में किसानों को अस्थायी कृषि पंप कनेक्शन दिए जाते हैं, लेकिन कई किसानों को रसीद नहीं दी जाती। किसानों से नकद राशि लेकर विभाग में जमा नहीं करने और अधिकारियों-कर्मचारियों की मिलीभगत से राशि का गबन किए जाने का आरोप लगाया गया है। यदि यह आरोप सही पाए जाते हैं तो यह न केवल सरकारी राजस्व की हानि का मामला है, बल्कि किसानों के साथ गंभीर धोखाधड़ी भी है।

दयाराम भुआर्य ने अपनी शिकायत में कहा है कि दुर्घटना के बाद पुलिस लगातार रसीद मांग रही है, जिसके कारण उन्हें बार-बार थाना और बिजली विभाग के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं। इससे उनका पूरा परिवार मानसिक तनाव और भय के माहौल में जी रहा है। उनका कहना है कि यदि समय पर विधिवत रसीद जारी की गई होती तो आज उन्हें इस तरह की परेशानियों का सामना नहीं करना पड़ता।

पीड़ित किसान ने प्रबंध निदेशक से पूरे मामले की उच्चस्तरीय एवं निष्पक्ष जांच कराने, सतर्कता (विजिलेंस) टीम को परलकोट क्षेत्र भेजने, किसानों से वसूली गई राशि की जांच करने तथा दोषी कर्मचारियों और अधिकारियों के विरुद्ध कठोर विभागीय एवं कानूनी कार्रवाई की मांग की है। शिकायत की प्रतिलिपि कलेक्टर कांकेर, अधीक्षण अभियंता कांकेर, अनुविभागीय अधिकारी राजस्व पखांजूर तथा कार्यपालन अभियंता विद्युत कंपनी पखांजूर को भी भेजी गई है।

अधिकारियों ने क्या कहा?

सत्यम चौधरी, कनिष्ठ अभियंता (JE) का पक्ष:
बस्तर टाइम्स ने जब इस मामले में कनिष्ठ अभियंता (JE) से फोन पर उनका पक्ष जानना चाहा, तो उन्होंने कहा, “इस संबंध में कार्तिक उसेंडी से पूछिए। मुझे संबंधित व्यक्ति ने कोई राशि नहीं दी है और न ही उनसे मेरी कोई मुलाकात हुई है। इस घटना की जानकारी मुझे दो दिन पहले मिली है। मैंने पूरे मामले में अपना प्रतिवेदन उच्च कार्यालय को भेज दिया है। फिलहाल मैं इस मामले में कोई बाइट या टिप्पणी नहीं दूंगा।”

विद्युत विभाग के कर्मचारी कार्तिक उसेंडी का पक्ष:
बस्तर टाइम्स के संवाददाता ने जब फोन पर कार्तिक उसेंडी से इस मामले में उनका पक्ष जानना चाहा, तो उन्होंने कहा, “इस संबंध में JE साहब ही बेहतर जानकारी दे सकते हैं, आप उनसे बात कर लीजिए।” जब उनसे पूछा गया कि किसान के अनुसार फरवरी 2026 में टी.सी. कनेक्शन के लिए ₹3500 उन्हें ही दिए गए थे, तो तत्काल रसीद क्यों नहीं दी गई, 24 जून को ही रसीद क्यों काटी गई, क्या इस बीच राशि विभाग में जमा नहीं की गई, तथा ₹3500 लेने के बावजूद ₹2030 की ही रसीद क्यों जारी की गई, तब उन्होंने स्पष्ट जवाब नहीं दिया। उन्होंने कहा, “यह पुराना मामला है, रजिस्टर देखना पड़ेगा। जमा हुआ होगा, जानकारी लेकर बताता हूँ।” बाद में उन्होंने कार्यालय पहुंचकर जानकारी देने की बात कही। हालांकि, इसके बाद दोबारा फोन पर संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन उन्होंने कॉल रिसीव नहीं किया।

अब सबकी निगाह जांच और कार्रवाई पर

यह मामला केवल एक किसान की शिकायत तक सीमित नहीं है। यदि शिकायत में लगाए गए आरोपों की पुष्टि होती है, तो यह पूरे परलकोट क्षेत्र में वर्षों से चल रही गंभीर अनियमितताओं का खुलासा साबित हो सकता है। अब देखना होगा कि विद्युत विभाग और जिला प्रशासन इस शिकायत की निष्पक्ष जांच कर दोषियों पर क्या कार्रवाई करते हैं।

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