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पखांजुर/ गंदगी के दलदल में इलाज ! पखांजूर सिविल अस्पताल के बाथरूम की बदहाली ने खोली स्वास्थ्य व्यवस्था की पोल।

गंदगी के दलदल में इलाज ! पखांजूर सिविल अस्पताल के बाथरूम की बदहाली ने खोली स्वास्थ्य व्यवस्था की पोल।

बस्तर टाइम्स न्यूज़, पखांजूर/ जहां एक ओर सरकार अस्पतालों को स्वच्छ, सुरक्षित और मरीजों के अनुकूल बनाने के लिए करोड़ों रुपये खर्च कर रही है, वहीं कांकेर जिले के शासकीय सिविल अस्पताल पखांजूर की हकीकत इन दावों पर गंभीर सवाल खड़े कर रही है। अस्पताल के बाथरूम और शौचालय की स्थिति इतनी बदहाल है कि मरीज और उनके परिजन इसका उपयोग करने से भी कतराने लगे हैं। गंदगी, बदबू, काई, जाम नालियां और सफाई व्यवस्था की लापरवाही अस्पताल प्रशासन की कार्यशैली पर प्रश्नचिह्न लगा रही है।
अस्पताल परिसर के बाथरूम की तस्वीरें बेहद चिंताजनक स्थिति बयां करती हैं। वॉश बेसिन के नीचे जमा काली गंदगी, फर्श पर फैली काई, नालियों के आसपास जमा मैल और दीवारों पर फैले गंदे निशान साफ संकेत देते हैं कि यहां लंबे समय से नियमित सफाई नहीं हुई है। बाथरूम के फर्श इतना गंदा और फिसलनभरा दिखाई दे रहा है कि किसी भी समय मरीज या बुजुर्ग गिरकर घायल हो सकते हैं।

सबसे गंभीर बात यह है कि यह अस्पताल प्रतिदिन सैकड़ों मरीजों और उनके परिजनों की आवाजाही वाला प्रमुख स्वास्थ्य केंद्र है। यहां दूर-दराज के ग्रामीण इलाकों से भी लोग इलाज कराने पहुंचते हैं। ऐसे अस्पताल में यदि शौचालय और बाथरूम की यह स्थिति है, तो संक्रमण फैलने का खतरा भी कई गुना बढ़ जाता है। साथ ही गंदे शौचालय बैक्टीरिया, फंगस और अन्य संक्रामक रोगों के प्रसार का बड़ा कारण बन सकते हैं।

स्थानीय लोगों का कहना है कि अस्पताल में साफ-सफाई को लेकर कई बार मौखिक शिकायतें की गईं, लेकिन स्थिति में कोई सुधार नहीं हुआ। मरीजों के परिजनों का आरोप है कि अस्पताल में सफाई कर्मी होने के बावजूद नियमित सफाई नहीं होती। बदबू और गंदगी के कारण मरीजों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
विडंबना यह है कि एक ओर स्वास्थ्य विभाग आम नागरिकों को स्वच्छता अपनाने और संक्रमण से बचाव के लिए जागरूक करता है, वहीं दूसरी ओर सरकारी अस्पताल का यह हाल विभागीय दावों की पोल खोल रहा है। यदि अस्पताल जैसे संवेदनशील स्थान पर ही स्वच्छता के मानकों का पालन नहीं होगा तो आम जनता से क्या अपेक्षा की जा सकती है?
अस्पताल में भर्ती मरीजों के परिजनों का कहना है कि कई बार मजबूरी में गंदे शौचालय का उपयोग करना पड़ता है। बरसात के मौसम में यह स्थिति और अधिक गंभीर हो जाती है। फर्श पर जमा पानी और गंदगी से फिसलने का खतरा बना रहता है। इससे बुजुर्ग, महिलाएं और बच्चे सबसे अधिक प्रभावित होते हैं।
स्थानीय नागरिकों ने मांग की है कि अस्पताल परिसर में तत्काल विशेष सफाई अभियान चलाया जाए, शौचालयों और बाथरूम की नियमित सफाई सुनिश्चित की जाए तथा जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाए। यदि समय रहते व्यवस्था नहीं सुधारी गई तो किसी भी दिन संक्रमण या दुर्घटना जैसी गंभीर स्थिति पैदा हो सकती है।
अब बड़ा सवाल यह है कि क्या स्वास्थ्य विभाग इन तस्वीरों को गंभीरता से लेकर तत्काल कार्रवाई करेगा, या फिर मरीजों को इसी गंदगी के बीच इलाज कराने के लिए मजबूर रहना पड़ेगा? अस्पताल में स्वच्छता केवल सुविधा नहीं, बल्कि मरीजों का मौलिक अधिकार और स्वास्थ्य सुरक्षा का महत्वपूर्ण हिस्सा है।

जनता की मांग

1. अस्पताल के सभी बाथरूम और शौचालयों की तत्काल गहन सफाई कराई जाए।
2. प्रतिदिन नियमित सफाई और निरीक्षण की व्यवस्था लागू की जाए।
3. जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय कर कार्रवाई की जाए।
4. मरीजों और परिजनों के लिए स्वच्छ एवं सुरक्षित शौचालय उपलब्ध कराए जाएं।

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