भानुप्रतापपुर/ पद बदला, जगह बदली… रिश्ते नहीं, अश्वनी प्रधान की विदाई में छलकीं भावनाएं।
दुर्घटना के कठिन दौर में साथ खड़े महाविद्यालय परिवार को कभी नहीं भूलूंगा : अश्वनी प्रधान

दुर्घटना के कठिन दौर में साथ खड़े महाविद्यालय परिवार को कभी नहीं भूलूंगा : अश्वनी प्रधान
बस्तर टाइम्स न्यूज, भानुप्रतापपुर/ शासकीय महर्षि वाल्मीकि स्नातकोत्तर महाविद्यालय भानुप्रतापपुर के सहायक ग्रेड-1 अश्वनी प्रधान की पदोन्नति के उपरांत शासकीय स्वामी आत्मानंद अंग्रेजी माध्यम महाविद्यालय, जगदलपुर में छात्रावास अधीक्षक के पद पर पदस्थापना होने पर शनिवार को महाविद्यालय परिवार की ओर से भावुक एवं आत्मीय विदाई समारोह आयोजित किया गया। 3 वर्ष तक महाविद्यालय में सेवाएं देने वाले प्रधान को विदाई देते समय जहां उनकी पदोन्नति की खुशी थी, वहीं बिछड़ने की कसक भी साफ दिखाई दी। सहकर्मियों ने उनके साथ बिताए अनुभव और यादें साझा कीं तो माहौल कई बार हंसी से खिल उठा और कई बार आंखें नम हो गईं।
समारोह में प्राचार्य डॉ. रश्मि सिंह ने कहा कि अश्वनी प्रधान ने महाविद्यालय में अपने दायित्वों का निर्वहन हमेशा सहजता, सहयोग और सकारात्मक सोच के साथ किया। कई चुनौतीपूर्ण कार्यों को उन्होंने मुस्कुराते हुए पूरा किया और आवश्यकता पड़ने पर अवकाश के दिनों में भी संस्था के कार्यों में सहयोग दिया। उन्होंने कहा कि प्रधान की कार्यशैली और सहयोगी स्वभाव के कारण उन्होंने महाविद्यालय परिवार में विशेष स्थान बनाया है।
प्राचार्य ने कहा कि पद और जिम्मेदारियां बदलती रहती हैं, लेकिन सहकर्मियों के साथ बने रिश्ते और उनसे जुड़ी यादें हमेशा साथ रहती हैं। उन्होंने नई जिम्मेदारी के लिए अश्वनी प्रधान को शुभकामनाएं देते हुए विश्वास जताया कि वे छात्रावास अधीक्षक के रूप में भी पूरी लगन, ईमानदारी और उत्साह के साथ दायित्व निभाएंगे तथा नई संस्था का नाम रोशन करेंगे।
कार्यक्रम के विशिष्ट अतिथि सेवानिवृत्त प्राध्यापक श्यामानंद डेहरिया ने कहा कि किसी कर्मचारी की पहचान केवल उसके पद से नहीं, बल्कि उसके व्यवहार, कर्तव्यनिष्ठा और सहयोग की भावना से होती है। अश्वनी प्रधान ने अपने सरल और मिलनसार व्यवहार से महाविद्यालय परिवार में अलग पहचान बनाई है। उन्होंने नई पदस्थापना के लिए प्रधान को शुभकामनाएं दीं। सेवानिवृत्त क्रीड़ा अधिकारी चंद्रिका प्रसाद ठाकुर ने प्रधान की खेल गतिविधियों में रुचि और महाविद्यालय की विभिन्न गतिविधियों में सक्रिय सहभागिता को याद किया। उन्होंने कहा कि प्रधान हमेशा उत्साह के साथ संस्था के कार्यक्रमों में भाग लेते रहे और उनका सहयोग सराहनीय रहा। उन्होंने विश्वास जताया कि नई जिम्मेदारी में भी वे बेहतर कार्य करेंगे। जनभागीदारी समिति के अध्यक्ष रत्नेश सिंह ने कहा कि यह विदाई किसी रिश्ते का अंत नहीं, बल्कि नई जिम्मेदारी की शुरुआत है। पदोन्नति उनके परिश्रम और कार्य के प्रति समर्पण का परिणाम है। उन्होंने प्रधान के उज्ज्वल भविष्य की कामना की।
इस अवसर पर वरिष्ठ प्राध्यापक कमल किशोर प्रधान, रितेश कुमार नाग, अनिल साहू और सुरेश ताराम ने भी अश्वनी प्रधान के साथ बिताए खट्टे-मीठे अनुभव साझा किए। वक्ताओं ने उनके सरल स्वभाव, सहयोगी कार्यशैली और मिलनसार व्यक्तित्व को याद करते हुए कहा कि महाविद्यालय में उनकी कमी निश्चित रूप से महसूस होगी।
दुर्घटना के समय मिला साथ कभी नहीं भूलूंगा।
विदाई समारोह का सबसे भावुक क्षण तब आया, जब अश्वनी प्रधान ने नम आंखों से अपने विचार रखे। उन्होंने कहा कि महाविद्यालय परिवार के साथ उनका रिश्ता केवल नौकरी तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह परिवार जैसा बन गया है। उन्होंने विशेष रूप से अपनी दुर्घटना के कठिन समय को याद करते हुए कहा कि उस दौरान महाविद्यालय परिवार ने उनका और उनके परिवार का जिस तरह साथ दिया, उसे वे जीवनभर नहीं भूलेंगे। मेरे दुर्घटना के समय महाविद्यालय परिवार ने जिस तरह मेरा और मेरे परिवार का ख्याल रखा, वह मेरे लिए बहुत बड़ी बात थी। सभी ने परिवार के सदस्य की तरह सहयोग किया। यहां मुझे हमेशा सम्मान, अपनापन और सहयोग मिला। यही इस महाविद्यालय से मेरी सबसे बड़ी पूंजी है। अंत मे उन्होंने प्राचार्य डॉ. रश्मि सिंह सहित सभी प्राध्यापकों, अधिकारियों और कर्मचारियों के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि यहां से मिले अनुभव और मार्गदर्शन उन्हें आगे भी प्रेरित करते रहेंगे।
कार्यक्रम के अंत में प्राचार्य डॉ. रश्मि सिंह ने अश्वनी प्रधान को स्मृति चिन्ह भेंट कर सम्मानित किया। स्मृति चिन्ह सौंपे जाने के दौरान माहौल भावुक हो गया। सहकर्मियों ने तालियों के साथ उन्हें नई जिम्मेदारी के लिए शुभकामनाएं दीं। इस मौके पर महाविद्यालय के समस्त प्राध्यापक, अधिकारी-कर्मचारी उपस्थित रहे।




