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भानुप्रतापपुर/ कालीबाड़ी में मां काली मंदिर स्थापना दिवस पर भव्य कलश यात्रा, बंग समाज में उमड़ा आस्था का सैलाब।

कालीबाड़ी में मां काली मंदिर स्थापना दिवस पर भव्य कलश यात्रा, बंग समाज में उमड़ा आस्था का सैलाब।

भानुप्रतापपुर, 26 मार्च (श्रीदाम ढाली)/ बंग समाज भानुप्रतापपुर द्वारा कालीबाड़ी स्थित मां काली मंदिर स्थापना दिवस के उपलक्ष्य पर बुधवार शाम नगर में भव्य कलश यात्रा निकाली गई। इस अवसर पर पूरे क्षेत्र में श्रद्धा, भक्ति और उत्साह का अद्भुत संगम देखने को मिला। यात्रा में बड़ी संख्या में बंग समाज की मातृशक्ति ने पारंपरिक वेशभूषा में शामिल होकर कार्यक्रम की शोभा बढ़ाई।

 

कलश यात्रा कालीबाड़ी मंदिर परिसर से प्रारंभ होकर नगर के प्रमुख मार्गों से गुजरते हुए पुनः मंदिर परिसर में सम्पन्न हुई। यात्रा के दौरान महिलाएं सिर पर कलश धारण कर, मंगल गीतों और जयकारों के साथ आगे बढ़ती रहीं। पूरा वातावरण जय मां काली के उद्घोष से भक्तिमय हो गया।

इस अवसर पर बंग समाज के अध्यक्ष विष्णुपद साहा ने कहा कि काली पूजा बंगाली समाज का एक प्रमुख और अत्यंत महत्वपूर्ण धार्मिक उत्सव है, जिसे हर वर्ष बड़े ही धूमधाम और आस्था के साथ मनाया जाता है। उन्होंने बताया कि मां काली शक्ति और साहस की प्रतीक हैं, और उनकी आराधना से समाज में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। स्थापना दिवस के इस आयोजन का उद्देश्य नई पीढ़ी को अपनी संस्कृति, परंपराओं और धार्मिक मूल्यों से जोड़ना है।
उन्होंने यह भी कहा कि बंगाली समाज में काली पूजा का विशेष महत्व होता है। यह पर्व केवल धार्मिक अनुष्ठान ही नहीं, बल्कि सामाजिक एकता और सांस्कृतिक पहचान का प्रतीक भी है। इस दौरान लोग अपने घरों और मंदिरों को आकर्षक ढंग से सजाते हैं, विशेष पूजा-अर्चना की जाती है और प्रसाद वितरण किया जाता है। कालीबाड़ी में भी इन परंपराओं का पालन पूरे विधि-विधान के साथ किया गया।

कलश यात्रा में शामिल महिलाएं पारंपरिक बंगाली साड़ी, गहनों और श्रृंगार में सजी-धजी नजर आईं, जो इस आयोजन की सबसे खास झलक रही। उनके चेहरे पर भक्ति और उत्साह साफ झलक रहा था। युवतियों और बच्चों ने भी बढ़-चढ़कर भाग लिया, जिससे यह आयोजन और अधिक जीवंत हो गया।
कार्यक्रम के दौरान समाज के पदाधिकारियों और वरिष्ठजनों की सक्रिय भागीदारी रही। आयोजन को सफल बनाने में सभी ने मिलकर योगदान दिया। सुरक्षा और व्यवस्था के भी समुचित इंतजाम किए गए थे, जिससे यात्रा शांतिपूर्ण ढंग से सम्पन्न हो सकी।
समापन पर मंदिर परिसर में विशेष पूजा-अर्चना और आरती का आयोजन किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे। अंत मे भंडारा प्रसाद वितरण किया गया।

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