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कांकेरछत्तीसगढ़भानुप्रतापपुर

भानुप्रतापपुर/ आरीडोंगरी माइंस में अनियमितताओं का आरोप, आदिवासी किसान विकास समिति के कुछ पदाधिकारियों व ठेकेदार पर गंभीर सवाल।

आरीडोंगरी माइंस में अनियमितताओं का आरोप, आदिवासी किसान विकास समिति के कुछ पदाधिकारियों व ठेकेदार पर गंभीर सवाल।

भानुप्रतापपुर (28 मार्च)। सीएमडीसी माइंस आरीडोंगरी क्षेत्र में आदिवासी किसान विकास समिति के कुछ पदाधिकारियों तथा लौह अयस्क खनन ठेकेदार पर क्षेत्र के लोगों, शासन-प्रशासन एवं राजस्व को नुकसान पहुंचाने के गंभीर आरोप लगे हैं। विरोध कर रहे ग्रामीणों का कहना है कि वे माइंस या शासन का विरोध नहीं कर रहे, बल्कि वहां हो रही कथित अनियमितताओं और गलत कार्यप्रणाली का विरोध कर रहे हैं।

ग्रामीणों ने प्रेस कॉन्फ्रेंस के माध्यम से आरोप लगाया कि समिति के कुछ पदाधिकारी और ठेकेदार मिलकर क्षेत्र के हितों के विपरीत कार्य कर रहे हैं, जिससे स्थानीय लोगों, मजदूरों और विकास कार्यों को नुकसान हो रहा है। उन्होंने कहा कि इन सभी मामलों की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए और जल्द ही लिखित शिकायत तथा कानूनी कार्रवाई भी की जाएगी।

मुख्य आरोप इस प्रकार हैं:

1. स्थानीयों की अनदेखी कर भर्ती:
बिना समिति के सभी सदस्यों एवं ग्राम पंचायतों की सहमति के, प्रभावित गांवों को दरकिनार कर बाहरी लोगों की गुपचुप तरीके से माइंस में भर्ती की गई है। इससे स्थानीय युवाओं के साथ अन्याय हुआ है।

2. कम मजदूरी का आरोप:
कुछ मजदूरों को प्रशिक्षण के नाम पर रखकर मात्र 180 रुपये प्रतिदिन के हिसाब से भुगतान किया जा रहा है, जो कि निर्धारित माइनिंग गाइडलाइन एवं मनरेगा मजदूरी दर से भी कम है।

3. पदाधिकारियों पर निजी लाभ का आरोप:
समिति के कुछ पदाधिकारियों द्वारा अपने निजी वाहन एवं मशीनें माइंस में लगाई गई हैं और ठेकेदार से कमीशन लेने की आशंका जताई गई है।

4. 2% लाभांश राशि का हिसाब नहीं:
माइंस प्रबंधन के साथ हुए अनुबंध के अनुसार 2% राशि क्षेत्रीय विकास में खर्च होनी थी, लेकिन अब तक इसका कोई सार्वजनिक लेखा-जोखा नहीं दिया गया है।

5. राशि संग्रह में पारदर्शिता का अभाव:
परिवहन कार्य के लिए स्थानीय लोगों से 5000 रुपये, मजदूरों से 1100 रुपये और बाहरी लोगों से 11000 रुपये तक लिए जाने का आरोप है। साथ ही प्रति ट्रिप 100 रुपये भी वसूले जा रहे हैं, जिसका कोई स्पष्ट हिसाब नहीं दिया गया।

6. समिति के नाम का दुरुपयोग:
आरोप है कि कुछ पदाधिकारी समिति के नाम का उपयोग कर स्वयं परिवहन और भर्ती ठेकेदारी कर रहे हैं तथा अन्य लोगों के अवसर छीन रहे हैं।

7. आक्शन दर में कमी से राजस्व नुकसान:
लौह अयस्क की बिक्री दर में गिरावट के कारण प्रति टन लगभग 565 रुपये का नुकसान बताया गया है, जिससे करोड़ों रुपये के राजस्व नुकसान की आशंका जताई गई है।

8. रोजगार के वादे पूरे नहीं:
माइंस शुरू होने के समय स्थानीय लोगों को 1500–2000 रोजगार देने का आश्वासन दिया गया था, लेकिन अब तक यह पूरा नहीं हुआ है। संबंधित अधिकारी पर कार्रवाई की मांग भी की गई है।

ग्रामीणों का कहना है कि जब वे इन मुद्दों का विरोध करते हैं तो उनके खिलाफ माहौल बनाया जाता है और मजदूरों पर दबाव डालकर उन्हें मानसिक रूप से परेशान किया जाता है। साथ ही क्षेत्र में भ्रम फैलाकर अशांति उत्पन्न करने की कोशिश की जा रही है।

ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि इन सभी मामलों की निष्पक्ष जांच नहीं हुई तो वे क्षेत्र के लोगों के साथ मिलकर धरना-प्रदर्शन और अनशन करने को बाध्य होंगे। उन्होंने क्षेत्र के जनप्रतिनिधियों, सामाजिक संगठनों, प्रिंट एवं इलेक्ट्रॉनिक मीडिया से भी अपील की है कि वे इस मामले में हस्तक्षेप करें और सच्चाई सामने लाने में सहयोग करें, ताकि क्षेत्र का समुचित विकास हो सके और अवैध गतिविधियों पर रोक लगाई जा सके।

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