
खुदीराम बोस की पुण्यतिथि पर आरक्षण हमारा अधिकार आंदोलन के 95वें दिन युवाओं ने लिया संघर्ष का संकल्प
बस्तर टाइम्स न्यूज, रुद्रपुर/ शहीद खुदीराम बोस की पुण्यतिथि के अवसर पर बुधवार को “आरक्षण हमारा अधिकार” आंदोलन के 95वें दिन श्रद्धांजलि कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में उपस्थित युवाओं, समाजसेवियों एवं सामाजिक कार्यकर्ताओं ने शहीद खुदीराम बोस के चित्र पर पुष्प अर्पित कर उन्हें श्रद्धांजलि दी और उनके साहस, त्याग तथा देशप्रेम से प्रेरणा लेते हुए समाज के अधिकारों की लड़ाई को मजबूती से आगे बढ़ाने का संकल्प लिया।
कार्यक्रम के दौरान बंगाली समाज के आरक्षण सहित विभिन्न सामाजिक अधिकारों को लेकर आंदोलन की आगामी रणनीति पर भी विस्तार से चर्चा की गई। उपस्थित लोगों ने कहा कि आंदोलन अब केवल धरने तक सीमित न रहकर व्यापक सामाजिक सहभागिता के साथ आगे बढ़ाया जाएगा। इसके लिए बंगाली समाज के विभिन्न संगठनों, युवाओं, विद्यार्थियों, बुद्धिजीवियों और समाजसेवियों को एक मंच पर लाने का प्रयास किया जाएगा।
खुदीराम बोस की शहादत से लिया संघर्ष का संदेश
कार्यक्रम में वक्ताओं ने शहीद खुदीराम बोस के जीवन को याद करते हुए कहा कि वह भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन के सबसे कम उम्र के क्रांतिकारियों में से एक थे। भारत सरकार के संस्कृति मंत्रालय के अभिलेखों के अनुसार उनका जन्म 3 दिसंबर 1889 को मिदनापुर में हुआ था और 11 अगस्त 1908 को मुजफ्फरपुर में उन्हें फांसी दी गई। वे उस समय केवल 18 वर्ष के थे।
खुदीराम बोस ने कम उम्र में ही स्वतंत्रता आंदोलन में सक्रिय भूमिका निभाई और ब्रिटिश शासन के विरुद्ध क्रांतिकारी गतिविधियों से जुड़े। मुजफ्फरपुर मामले में गिरफ्तारी के बाद उन्हें मृत्युदंड दिया गया। सरकारी ऐतिहासिक अभिलेखों में उल्लेख है कि मृत्युदंड सुनाए जाने के बाद भी उनके चेहरे पर भय के बजाय दृढ़ता और मुस्कान दिखाई दी।
इसी साहस को याद करते हुए कार्यक्रम में युवाओं ने कहा कि खुदीराम बोस ने देश की आजादी के लिए अपना जीवन समर्पित कर दिया, इसलिए समाज के लोकतांत्रिक और संवैधानिक अधिकारों के लिए संघर्ष करने वालों को भी धैर्य, एकता और दृढ़ संकल्प के साथ आगे बढ़ना चाहिए।
“95 दिन क्या, 1095 दिन भी संघर्ष करना पड़े तो पीछे नहीं हटेंगे” — सुब्रत कुमार विश्वास
समाजसेवी सुब्रत कुमार विश्वास ने कहा कि खुदीराम बोस का जीवन आज के युवाओं के लिए त्याग और संघर्ष की प्रेरणा है।
उन्होंने कहा, “अगर 18 वर्ष की उम्र में खुदीराम बोस देश के लिए फांसी के फंदे तक जा सकते हैं और अपने उद्देश्य से पीछे नहीं हटे, तो हम अपने समाज के अधिकारों के लिए 95 दिन क्या, जरूरत पड़ी तो 1095 दिन भी धरना और संघर्ष कर सकते हैं। समाज के अधिकारों और आने वाली पीढ़ियों के भविष्य के लिए हर संभव प्रयास किया जाएगा।”
उन्होंने कहा कि जब लड़ाई न्याय, सत्य और अधिकार के लिए होती है तो संघर्ष लंबा हो सकता है, लेकिन पीछे हटना समाधान नहीं है। उन्होंने महाभारत का उदाहरण देते हुए कहा कि अधिकारों की लड़ाई में कई बार अपने लोगों के बीच भी मतभेद सामने आते हैं, लेकिन न्याय और अधिकार के लिए दृढ़ता से खड़ा होना आवश्यक है।
20 सितंबर को बड़े आंदोलन की तैयारी
कार्यक्रम में आगामी 20 सितंबर को बंगाली समाज की बड़ी भागीदारी के साथ जिला मुख्यालय घेराव सहित व्यापक आंदोलन की रूपरेखा तैयार करने पर चर्चा हुई। वक्ताओं ने कहा कि 20 सितंबर को समाज के लिए महत्वपूर्ण दिन के रूप में देखते हुए बड़ी संख्या में लोगों को एकत्रित करने का प्रयास किया जाएगा।
बैठक में यह भी निर्णय लिया गया कि आंदोलन को व्यापक स्वरूप देने के लिए बंगाली समाज के सभी सामाजिक संगठनों और विभिन्न क्षेत्रों में कार्य कर रहे प्रतिनिधियों से संवाद किया जाएगा तथा उन्हें सम्मानजनक तरीके से आंदोलन में भागीदारी के लिए आमंत्रित किया जाएगा।
“सभी संगठनों को साथ लेकर आगे बढ़ने की आवश्यकता” — तरुण विश्वास
वरिष्ठ समाजसेवी तरुण विश्वास ने कहा कि बंगाली समाज लंबे समय से आरक्षण की मांग करता रहा है। अब आवश्यकता इस बात की है कि समाज की इस मांग को संगठित और प्रभावी तरीके से सरकार के सामने रखा जाए।
उन्होंने कहा, “बंगाली समाज के अधिकारों की लड़ाई किसी एक व्यक्ति या संगठन की लड़ाई नहीं है। यह पूरे समाज की लड़ाई है। हमें एकजुट होकर आगे बढ़ना होगा और समाज की मांग को ताकतवर तरीके से सरकार के सामने रखना होगा। हम सभी इस संघर्ष में अपनी भागीदारी निभाते रहेंगे।”
उन्होंने कहा कि वर्षों से चली आ रही समस्याओं को दूर करने के लिए समाज में बदलाव की आवश्यकता है और इसके लिए युवाओं की भूमिका महत्वपूर्ण होगी।
“हर मूलभूत अधिकार की आवाज उठाएंगे” — सपन सरकार
समाजसेवी सपन सरकार ने कहा कि बंगाली समाज के प्रत्येक मूलभूत अधिकार को लेकर आवाज उठाने की आवश्यकता है।
उन्होंने कहा, “हम सभी को मिलकर ऐसे समाज का निर्माण करना है जिसमें जाति-पाति और भेदभाव से ऊपर उठकर प्रत्येक व्यक्ति को उसका अधिकार और सम्मान मिले। बंगाली समाज के अधिकारों की बात को आगे ले जाने के लिए सभी को एकजुट होकर प्रयास करना होगा।”
आंदोलन को व्यापक बनाने की तैयारी
कार्यक्रम में उपस्थित लोगों ने कहा कि आने वाले दिनों में गांवों, नगरों और विभिन्न क्षेत्रों में बैठकें आयोजित कर समाज के लोगों को आंदोलन से जोड़ा जाएगा। युवाओं और विद्यार्थियों की भागीदारी बढ़ाने के साथ-साथ वरिष्ठ समाजसेवियों एवं विभिन्न सामाजिक संगठनों से भी संवाद किया जाएगा।
वक्ताओं ने कहा कि “आरक्षण हमारा अधिकार” आंदोलन को किसी व्यक्ति विशेष तक सीमित न रखते हुए इसे समाज की सामूहिक आवाज बनाने का प्रयास किया जाएगा। इसके लिए सभी सामाजिक संगठनों को सम्मानपूर्वक आमंत्रित कर साझा मंच तैयार करने की दिशा में काम किया जाएगा।
कार्यक्रम के अंत में उपस्थित लोगों ने शहीद खुदीराम बोस को नमन करते हुए उनके साहस, त्याग और देशप्रेम को अपने संघर्ष की प्रेरणा बनाने का संकल्प लिया।
श्रद्धांजलि कार्यक्रम में ये लोग रहे उपस्थित
श्रद्धांजलि कार्यक्रम में समाजसेवी सुब्रत कुमार विश्वास, वरिष्ठ समाजसेवी तरुण विश्वास, दीपक विश्वास, सपन सरकार, अमल मंडल, निमेष राय, भजन राय, निपेन विश्वास, जयदेव मादक, विकास सरकार, आशीष, संजय आईस, अजय, विद्युत, विकास विश्वास, रोहित मंडल, अभिमन्यु सना, राकेश सिकदर, विनोद, अनिल, विक्की राय सहित अन्य सामाजिक कार्यकर्ता एवं युवा उपस्थित रहे।


