भानुप्रतापपुर/ इनोवेशन महाकुंभ में युवाओं को मिला सफलता का नया फॉर्मूला।
महाविद्यालय में एकदिवसीय कार्यशाला, नवाचार और स्टार्टअप पर दिया गया जोर।

महाविद्यालय में एकदिवसीय कार्यशाला, नवाचार और स्टार्टअप पर दिया गया जोर।
भानुप्रतापपुर (8 अप्रैल 2026)। शासकीय महर्षि वाल्मीकि स्नातकोत्तर महाविद्यालय में बुधवार को “इनोवेशन महाकुंभ 1.0” विषय पर एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन उत्साहपूर्वक सम्पन्न हुआ। कार्यक्रम की अध्यक्षता प्राचार्य डॉ. रश्मि सिंह ने की, जबकि जनभागीदारी समिति के अध्यक्ष रत्नेश सिंह विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। विषय विशेषज्ञ एवं मुख्य वक्ता के रूप में डॉ. कृष्ण कुमार वर्मा तथा डॉ. शत्रुघन पटेल ने विद्यार्थियों को नवाचार और उद्यमिता के प्रति प्रेरित किया। कार्यक्रम का शुभारंभ छत्तीसगढ़ महतारी एवं माँ सरस्वती की पूजा-अर्चना से हुआ।
प्राचार्य डॉ. रश्मि सिंह ने अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में कहा कि बस्तर क्षेत्र संसाधनों और संभावनाओं से भरपूर है, किन्तु जागरूकता और शिक्षा के अभाव में स्थानीय लोग उसका पूर्ण लाभ नहीं उठा पा रहे हैं। उन्होंने चिरौंजी, तेंदूपत्ता, महुआ जैसे वन उत्पादों का उदाहरण देते हुए बताया कि उचित बाजार और ज्ञान के अभाव में इनका वास्तविक मूल्य स्थानीय लोगों तक नहीं पहुंच पाता। उन्होंने विद्यार्थियों से आह्वान किया कि वे शिक्षा को केवल नौकरी का माध्यम न मानकर नवाचार और स्वरोजगार की दिशा में भी आगे बढ़ें तथा समाज में जागरूकता फैलाएं।
मुख्य वक्ता डॉ. कृष्ण कुमार वर्मा ने अपने प्रेरक उद्बोधन में विद्यार्थियों को नवाचार की वास्तविक अवधारणा से परिचित कराया। उन्होंने कहा कि शिक्षा का उद्देश्य केवल नौकरी प्राप्त करना नहीं, बल्कि विचारों की व्यापकता, समाज के प्रति जिम्मेदारी और समस्याओं के समाधान की क्षमता विकसित करना है। उन्होंने विद्यार्थियों से संवादात्मक शैली में प्रश्न करते हुए कहा कि यदि हर किसी को सरकारी नौकरी नहीं मिलती, तो क्या विकल्प हैं? इसका उत्तर है—इनोवेशन और उद्यमिता।
उन्होंने स्पष्ट किया कि इनोवेशन का अर्थ केवल कुछ नया बनाना नहीं, बल्कि समाज की वास्तविक समस्याओं का व्यावहारिक समाधान खोजना है। बस्तर जैसे क्षेत्र में प्राकृतिक संसाधनों की भरमार है, जिनका वैज्ञानिक और व्यावसायिक उपयोग कर स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर सृजित किए जा सकते हैं। उन्होंने इमली, आम, सीताफल जैसे उत्पादों के मूल्य संवर्धन के उदाहरण देते हुए बताया कि कैसे छोटे-छोटे विचार बड़े व्यवसाय का रूप ले सकते हैं।
डॉ. वर्मा ने कहा कि एक सफल इनोवेटर वही होता है जिसकी सोच खुली होती है और जो अपने आसपास की समस्याओं को गहराई से समझता है। उन्होंने विद्यार्थियों को प्रेरित किया कि वे अपने विचारों को सीमित न रखें, बल्कि उन्हें प्रयोग में लाकर समाज के हित में उपयोग करें। उन्होंने यह भी कहा कि नवाचार करते समय पर्यावरण संरक्षण का विशेष ध्यान रखना चाहिए, ताकि विकास और प्रकृति के बीच संतुलन बना रहे।
अपने संबोधन के अंत में उन्होंने कहा कि इनोवेशन महाकुंभ जैसे मंच युवाओं को अपनी प्रतिभा प्रदर्शित करने और विशेषज्ञों से मार्गदर्शन प्राप्त करने का सुनहरा अवसर प्रदान करते हैं। यदि विद्यार्थी सही दिशा में प्रयास करें, तो वे न केवल आत्मनिर्भर बन सकते हैं, बल्कि समाज और क्षेत्र के विकास में भी महत्वपूर्ण योगदान दे सकते हैं।
विषय विशेषज्ञ डॉ. शत्रुघन पटेल ने इनोवेशन महाकुंभ की अवधारणा को विस्तार से समझाते हुए कहा कि यह आयोजन युवाओं को उद्यमिता की दिशा में प्रेरित करने का एक सशक्त माध्यम है। उन्होंने बताया कि शहीद महेंद्र कर्मा विश्वविद्यालय एवं शिक्षा मंत्रालय के संयुक्त प्रयास से यह मंच तैयार किया गया है, जहां युवा अपने विचारों को प्रस्तुत कर सकते हैं। उन्होंने विभिन्न क्षेत्र जैसे कृषि, लघु वनोपज, आर्ट, टेक्नोलॉजी एवं स्वास्थ्य में नवाचार की संभावनाओं पर प्रकाश डाला और युवाओं से सक्रिय सहभागिता की अपील की।
जनभागीदारी समिति के अध्यक्ष रत्नेश सिंह ने अपने उद्बोधन में कहा कि इनोवेशन महाकुंभ युवाओं के लिए अवसरों का संगम है। उन्होंने कहा कि आज के समय में केवल डिग्री पर्याप्त नहीं है, बल्कि आत्मनिर्भर बनने के लिए नए विचार और स्टार्टअप की सोच आवश्यक है। उन्होंने युवाओं को प्रेरित करते हुए कहा कि वे बेरोजगारी को चुनौती के रूप में लें और स्वयं का रोजगार स्थापित करें। उन्होंने यह भी कहा कि ऐसे आयोजन युवाओं को दिशा देने के साथ-साथ उन्हें आत्मविश्वास प्रदान करते हैं।
कार्यक्रम में स्वागत उद्बोधन कार्यक्रम के संयोजक कमल किशोर प्रधान ने दिया, जबकि आभार प्रदर्शन एनईपी संयोजक रितेश कुमार नाग ने किया। कार्यक्रम का संचालन पत्रकारिता विभाग के विभागाध्यक्ष श्रीदाम ढाली ने किया। इस अवसर पर जनभागीदारी समिति के सदस्य राजकुमार नशीने, क्रीड़ा अधिकारी चेतन कुमार श्रीवास, मुख्य लिपिक अश्वनी प्रधान, मुकेश डहरवाल, योगेश यादव, ईश्वर सिन्हा, डॉ. स्नेहा रितेश नाग सहित समस्त प्राध्यापक, अधिकारी-कर्मचारी एवं बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे।




